Bhandara Crime: 71 करोड़ के रेत उत्खनन जुर्माने पर घमासान, शिवसेना ने प्रशासन की भूमिका पर उठाए सवाल

Bhandara Sand Mining: भंडारा के पवनी में अवैध रेत उत्खनन पर लगाए गए 71 करोड़ रुपये के जुर्माने को रद्द करने के फैसले पर विवाद बढ़ गया है। शिवसेना ने एसआईटी जांच की मांग की।
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भंडारा रेत घोटाला(सोर्सः सोशल मीडिया)
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71 Crore Sand Mining Penalty: स्वीकृत सीमा से अधिक रेत का अवैध उत्खनन करने के मामले में संबंधित ठेकेदार पर तहसीलदार की ओर से लगाया गया 71 करोड़ रुपये का जुर्माना रद्द किए जाने के फैसले से भंडारा जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। ठेकेदार ने यह जुर्माना न भरे जाने और बाद में उपविभागीय अधिकारी की ओर से इस आदेश को रद्द करने पर शिवसेना (शिंदे गुट) ने कड़ा विरोध जताया है। पार्टी ने पूरे मामले की विशेष जांच दल से निष्पक्ष जांच कराने और दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है।पवनी तहसील के गुडेगांव स्थित रेत घाट का ठेका नागपुर निवासी अनोजकुमार अगरवाल (प्रो।प्रा। तुषार अनोज अजितसरिया) को मिला था।

इस घाट से 14,130 ब्रास रेत उत्खनन की अनुमति थी, लेकिन वास्तव में 34,600 ब्रास रेत का उत्खनन किया गया। इस मामले में भंडारा के विधायक नरेंद्र भोंडेकर ने विधानसभा के शीतकालीन सत्र में ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के जरिए मुद्दा उठाया था, जिसके बाद तत्कालीन राजस्व मंत्री ने अधिकारियों पर कार्रवाई के निर्देश दिए थे। इसके बाद 9 जनवरी 2026 को पवनी के तहसीलदार ने ठेकेदार पर 71 करोड़ 27 लाख 60 हजार रुपये का जुर्माना लगाया था।

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शिवसेना ने एसआईटी जांच कि मांग की

हालांकि, 13 अगस्त 2026 को भंडारा की उपविभागीय अधिकारी माधुरी तिखे ने इस जुर्माने के आदेश को रद्द कर दिया, जिससे राजस्व के भारी नुकसान का आरोप लग रहा है।जांच में यह भी बात सामने आई है कि मई 2025 में संयुक्त पंचनामे के दौरान अवैध उत्खनन की पुष्टि होने के बाद उपविभागीय अधिकारी ने जिलाधिकारी को इटीएस (इलेक्ट्रॉनिक टोटल स्टेशन) सर्वे कराने के लिए पत्र लिखा था। आरोप है कि यदि प्रशासन की ओर से इटीएस सर्वे कराया जाता, तो यह जुर्माना 300 करोड़ रुपये से अधिक हो सकता था। शिवसेना के संजय कुंभलकर, अनिल गायधने, विकास मदनकर और नितिन धकाते ने चेतावनी दी है कि यदि मामले की एसआईटी जांच नहीं हुई तो वे तीव्र आंदोलन करेंगे।

दोबारा जांच के बाद तय करेंगे जुर्माना

भंडारा उपविभागीय अधिकारी माधुरी तिखे ने कहा कि क्षमता से अधिक रेत उत्खनन मामले में शासन के आदेशानुसार पुनः जांच करने के लिए तहसीलदार को निर्देशित किया गया है। दोबारा जांच के बाद तहसीलदार की जो रिपोर्ट आएगी, उसी आधार पर नया जुर्माना तय किया जाएगा। पहले लगाया गया जुर्माना पूरी तरह रद्द नहीं किया गया है बल्कि पुनर्मूल्यांकन के लिए भेजा गया है।

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