

Sambhajinagar Family Cremated Separately: महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर में खवड्या पहाड़ी पर घटित हुआ वह भयानक हादसा आज भी लोगों के रोंगटे खड़े कर देता है, जिसमें माता-पिता और उनके जवान बेटे की एक साथ मौत हो गई।
लेकिन इस दर्दनाक त्रासदी का सबसे संवेदनशील पहलू यह है कि जीवन भर आपसी कलह का सामना करने वाला यह परिवार मौत के बाद भी एक न हो सका। अंतिम विदाई के समय भी इनके बीच की दूरियां साफ नजर आईं।
खवड्या डोंगर की 250 फीट गहरी खाई में गिरने से मुरलीधर (48), उनकी पत्नी संगीता (42) और बेटे कुणाल (19) की मौत हो गई थी। इस भयानक घटना के बाद जब शव परिजनों को सौंपे गए, तो परिवार का बिखराव साफ नजर आया।
पुलिस ने पिता मुरलीधर का शव उनके भाई अण्णासाहेब चांदगुडे और बहन शोभा म्हस्के के सुपुर्द किया, जिन्होंने मुरलीधर का अंतिम संस्कार उनके पैतृक गांव धनगर पिंपलगांव (अंबड तहसील) में किया। दूसरी तरफ, मां संगीता और बेटे कुणाल के शव संगीता के पिता बबनराव गाभुड को सौंपे गए, जिसके बाद मायके के रिश्तेदारों ने उन दोनों का अंतिम संस्कार शहर के मुकुंदवाडी में करने का निर्णय लिया। इस तरह, एक ही दिन दुनिया उजाड़ने वाले इस परिवार के शवों को अंतिम विदाई भी दो अलग-अलग जगहों पर दी गई।
शुरुआती जांच में सामने आया था कि 19 वर्षीय कुणाल NEET-UG की तैयारी कर रहा था और डॉक्टर बनना चाहता था। उसने हाल ही में एक नया आईफोन खरीदा था और वह लगातार अपने पिता पर उसकी किस्तें चुकाने का दबाव बना रहा था।
इसी थक चुके EMI को लेकर शुक्रवार सुबह करीब 10 बजे घर में विवाद हुआ और कुणाल गुस्से में आकर पहाड़ी की तरफ भाग गया। उसे बचाने के प्रयास में पिता और फिर मां ने अपनी जान गंवा दी।
हालांकि, पुलिस प्रशासन और परिजनों का मानना है कि इस आत्मघाती कदम के पीछे केवल एक मोबाइल की किस्त का विवाद नहीं हो सकता। पुलिस उपायुक्त रत्नाकर नवले के अनुसार, इस मामले की गहराई से जांच की जा रही है कि क्या इस आत्महत्या के पीछे संपत्ति, खेत या नाते-रिश्तेदारों के बीच चल रहे गहरे पारिवारिक झगड़े की कोई बड़ी पृष्ठभूमि थी।
मृतक संगीता चांदगुडे एक यूट्यूबर थीं, जिनके 29,000 से अधिक सब्सक्राइबर्स थे। वह करीब छह साल पहले अपने बड़े बेटे की बीमारी से हुई मौत के बाद से ही पति मुरलीधर से अलग रह रही थीं। पुलिस जांच में सामने आया है कि संगीता ने अपनी मौत से पहले, अगस्त महीने में सोशल मीडिया पर कई रील और वीडियो पोस्ट किए थे। इन वीडियो में उन्होंने संपत्ति, खेती, बेटे और कुछ रिश्तेदारों को लक्षित करते हुए अपनी बात रखी थी।
अपनी मौत से ठीक एक दिन पहले शेयर किए गए वीडियो में उन्होंने रिश्तों में कद्र न होने का दर्द बयां करते हुए कहा था, रोटी तभी अच्छी लगती है जब वह दोनों तरफ से पके। अगर केवल एक ही व्यक्ति रिश्ता निभाने का प्रयास कर रहा है, तो ऐसे रिश्ते से बाहर निकल जाना ही बेहतर है। उनके ये वीडियो स्पष्ट संकेत देते हैं कि परिवार में लंबे समय से मानसिक तनाव और पारिवारिक विवाद चल रहा था, जिसने आखिरकार इस खौफनाक अंत का रूप ले लिया।
इस पूरे हंसते-खेलते परिवार के खत्म होने के बाद अब घर में सिर्फ कुणाल का पालतू कुत्ता शेरू अकेला रह गया है। कुणाल पिछले छह सालों से शेरू की देखभाल कर रहा था। हादसे के बाद से शेरू खिड़की के पास बैठकर लगातार रो रहा है और अपने मालिक का इंतजार कर रहा है।
कुणाल के रोते हुए बुजुर्ग नाना बबनराव गाभुड ने भारी मन से कहा कि कुणाल बेहद शांत और होनहार लड़का था। अब उन्होंने कुणाल की याद में शेरू को अपने पास रखने और उसकी देखभाल करने का फैसला किया है।