Bhandara Stray Dogs: भंडारा शहर में बढ़ती आवारा कुत्तों की संख्या पर नियंत्रण के लिए शुरू की जाने वाली नसबंदी और रेबीज प्रतिबंधक टीकाकरण मुहिम निविदा प्रक्रिया में उलझ गई है। नगरपालिका की ओर से कुत्तों की नसबंदी के लिए लगातार सात बार निविदाएं निकाली गईं, लेकिन अपेक्षित प्रतिसाद नहीं मिला।
आखिरकार आठवीं निविदा में छत्रपति संभाजीनगर के जानता राजा चैरिटेबल ट्रस्ट ने सबसे कम दर प्रस्तुत की। संस्था का चयन कर उसे कार्यादेश भी जारी कर दिया गया, लेकिन इसके बावजूद अब तक प्रत्यक्ष काम शुरू नहीं हुआ है।
शहर के विभिन्न परिसरों में आवारा कुत्तों के झुंड बढ़ते जा रहे हैं। रात के समय राहगीरों और दोपहिया वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कुत्तों द्वारा वाहन चालकों का पीछा करने, राहगीरों को दौड़ाने और छोटे बच्चों के आसपास झुंड में घूमने की घटनाओं से नागरिकों में भय का माहौल है।
कुछ क्षेत्रों में कुत्तों के काटने तथा पागल कुत्तों के उत्पात की शिकायतें भी सामने आती रही हैं। कुत्तों की संख्या नियंत्रित करने के लिए नसबंदी के साथ ही नियमित रेबीज प्रतिबंधक टीकाकरण आवश्यक है। लेकिन नसबंदी अभियान शुरू नहीं होने से नगरपालिका के सामने आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या पर नियंत्रण की चुनौती बनी हुई है।
आवारा कुत्तों की नसबंदी केवल शल्यक्रिया तक सीमित नहीं है। इसके लिए प्रशिक्षित कुत्ता पकड़ने वाली टीम, विशेष वाहन, पशु चिकित्सक, ऑपरेशन कक्ष, दवाएं, चिकित्सा उपकरण और सुरक्षित पिंजरों की आवश्यकता होती है। नसबंदी के बाद कुत्तों की देखभाल, टीकाकरण और उपचार के बाद उन्हें नियमानुसार उसी क्षेत्र में छोड़ने की व्यवस्था भी जरूरी है।
28 सितंबर को विश्व रेबीज दिवस मनाया जाता है। ऐसे में आवारा कुत्तों के व्यापक रेबीज टीकाकरण, नसबंदी और नागरिकों में जागरूकता पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। कुत्ते के काटने पर जख्म को तत्काल साबुन और पानी से धोकर चिकित्सकीय उपचार लेना आवश्यक है।
नागरिकों की सुरक्षा के लिए अब केवल निविदा प्रक्रिया पूरी करना पर्याप्त नहीं होगा। नसबंदी, टीकाकरण, शिकायतों पर तत्काल कार्रवाई, प्रशिक्षित पथक, पशु चिकित्सा सुविधा और कचरा प्रबंधन जैसे उपायों को एक साथ लागू करना जरूरी है।