Biomedical Waste Management (सोर्सः फाइल फोटो- सोशल मीडिया) 
भंडारा

अब नागपुर नहीं भेजना होगा मेडिकल कचरा, भंडारा मेडिकल कॉलेज ने संभाली बायो मेडिकल वेस्ट प्रबंधन की कमान

Bhandara Medical College: भंडारा शासकीय वैद्यकीय महाविद्यालय ने बायो मेडिकल वेस्ट प्रबंधन की जिम्मेदारी स्वतंत्र रूप से संभालते हुए स्थानीय यूनिट को ठेका दिया है।

आंचल लोखंडे

Bhandara Biomedical Waste Management: शासकीय वैद्यकीय महाविद्यालय (मेडिकल कॉलेज) में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के साथ ही अब बायो मेडिकल वेस्ट (जैव चिकित्सा अपशिष्ट) प्रबंधन की कमान भी कॉलेज प्रशासन ने पूरी तरह अपने हाथों में ले ली है। पूर्व में जिला सामान्य अस्पताल के अधीन रहने वाली यह व्यवस्था अब स्वतंत्र रूप से संचालित होगी। इसी कड़ी में फरवरी 2026 में जारी की गई। निविदा प्रक्रिया के तहत जिले की ही एक स्थानीय यूनिट को कचरा निस्तारण का ठेका दिया गया है।

जानकारी के अनुसार, 6 फरवरी 2026 को इस टेंडर की प्रक्रिया शुरू की गई थी, जो मार्च माह में संपन्न हुई। यह ठेका जिले में हाल ही में स्थापित डॉ. गोपाल व्यास की कंपनी को प्रदान किया गया है। हालांकि प्रशासन और संबंधित कंपनी के बीच औपचारिक करारनामा होना अभी शेष है, लेकिन इस नए प्रबंधन को लेकर प्रशासनिक गलियारों में चर्चाएं तेज हैं। महत्वपूर्ण बात यह है कि जिले के मोहाड़ी क्षेत्र में नई यूनिट शुरू होने से अब अस्पताल का कचरा नागपुर भेजने की आवश्यकता नहीं होगी।

प्रति बेड 210 रुपये का होगा भुगतान

सूत्रों से प्राप्त जानकारी के मुताबिक, नए टेंडर की दरें प्रति बेड 210 रुपये तय की गई हैं। वर्तमान में शासकीय वैद्यकीय महाविद्यालय में कुल 483 बेड की क्षमता है। इस हिसाब से अस्पताल से निकलने वाले हानिकारक कचरे के उठाव और सुरक्षित निस्तारण के लिए शासन संबंधित कंपनी को प्रति बेड 210 रुपये का भुगतान करेगा। स्थानीय स्तर पर यूनिट होने से परिवहन और समय की बड़ी बचत होने की उम्मीद है।

पारदर्शी और सुदृढ़ बनाने का प्रयास

शासकीय वैद्यकीय महाविद्यालय, भंडारा अधिष्ठाता (डीन) डॉ. सुजाता दूधगांवकर ने कहा कि अस्पताल में में बायो मेडिकल वेस्ट का प्रबंधन बेहद संवेदनशील विषय है। नई निविदा प्रक्रिया के माध्यम से हमने इस व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी और सुदृद्ध बनाने का प्रयास किया है। जिले में ही स्थानीय यूनिट होने से कचरे का समय पर निस्तारण सुनिश्चित हो सकेगा, जिससे अस्पताल की स्वच्छता और सुरक्षा मानकों में गुणात्मक सुधार आएगा।

नागपुर की कंपनी का एकाधिकार हुआ खत्म

इससे पहले जब अस्पताल का प्रबंधन जिला सामान्य अस्पताल के पास था, तब यह ठेका नागपुर की सुपर हाइजिंग कंपनी के पास हुआ करता था। चूंकि उस समय भंडारा जिले में कोई स्थानीय प्लांट मौजूद नहीं था, इसलिए पूरा कचरा प्रतिदिन नागपुर ले जाया जाता था।

अब जिले में ही निस्तारण की सुविधा उपलब्ध होने से न केवल स्थानीय उद्यमियों को प्रोत्साहन मिला है, बल्कि कचरा प्रबंधन की प्रक्रिया भी अधिक सुदृढ़ और पारदर्शी होने की संभावना जताई जा रही है। प्रशासन का मानना है कि इस नई व्यवस्था से अस्पताल की स्वच्छता और सुरक्षा मानकों में सुधार होगा।

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