Bhandara Mahayuti Internal Dispute: सत्ता में साझेदारी, लेकिन विकास निधि के वितरण में कथित भेदभाव। इस मुद्दे ने महायुति के भीतर की नाराजगी को सार्वजनिक कर दिया है। भंडारा के शिवसेना विधायक नरेंद्र भोंडेकर की नाराजगी और उद्योग मंत्री उदय सामंत के आश्वासन के बाद जिले के राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है।
विधायक भोंडेकर ने कहा कि राज्य में सत्ता में भागीदार होने के बावजूद मित्र दलों की ओर से निधि वितरण में भेदभाव किया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि पूरे वर्ष जिला नियोजन समिति से एक रुपया भी निधि नहीं मिली, जिसके कारण विकास कार्य प्रभावित हुए हैं। उन्होंने कहा कि पालक मंत्री से बार-बार मांग के बावजूद केवल आश्वासन मिला, वास्तविक निधि नहीं।
भोंडेकर ने मित्र दलों के नेताओं को अप्रत्यक्ष चेतावनी देते हुए कहा कि उनकी पार्टी महायुति के साथ खड़ी है और सभी को सहयोग कर रही है। उन्होंने 'मर्यादा में रहने' की चेतावनी देते हुए कहा कि उनकी पार्टी स्वर्गीय बालासाहेब ठाकरे के विचारों पर चलती है और उसे बदनाम करने का प्रयास नहीं किया जाना चाहिए। उनके इस बयान का राजनीतिक निशाना किस ओर है, इसे लेकर अटकलें शुरू हो गई हैं।
'आने वाला समय नरेंद्र भोंडेकर का ही होगा' कहना है उद्योग मंत्री उदय सामंत का जिन्होंने शिवसेना पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं की बैठक में भोंडेकर का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि भोंडेकर ने अपने क्षेत्र में अच्छा काम किया है और जानबूझकर बाधाएं खड़ी की गईं, तो शिवसेना उनका सामना करने में सक्षम है। सामंत ने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और वरिष्ठ नेतृत्व की सहमति से जनप्रतिनिधियों तथा समन्वय समिति द्वारा तय निधि रोकने वाले अधिकारियों को चेतावनी दी गई है। उन्होंने जिलाधिकारी के माध्यम से भोंडेकर और पार्टी के लिए निर्धारित पूरी निधि तत्काल उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया।
अब असली सवाल यह है कि सामंत का आश्वासन केवल निधि तक सीमित है या महायुति के भीतर संतुलन का राजनीतिक संदेश भी है। विधायक भोंडेकर को पूरे वर्ष निधि न मिलने का दावा सत्ता में समन्वय पर सवाल खड़ा करता है। “मर्यादा में रहें” जैसी सार्वजनिक चेतावनी बताती है कि असंतोष केवल प्रशासनिक नहीं, राजनीतिक भी है। अब निधि कितनी और कितनी जल्दी मिलती है, इसी से आश्वासन की विश्वसनीयता तय होगी।