

Yavatmal Health Workers Protest: यवतमाल जिले के महागांव ग्रामीण अस्पताल में ड्यूटी पर तैनात डॉक्टरों और कर्मचारियों पर 18 अगस्त की रात हुए कथित जानलेवा हमले के विरोध में जिलेभर के स्वास्थ्य कर्मचारियों ने आंदोलन शुरू कर दिया है। घटना के विरोध में बुधवार को विभिन्न ग्रामीण एवं उपजिला अस्पतालों में कामबंद आंदोलन किया गया। कर्मचारियों ने आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी और अस्पताल कर्मियों को सुरक्षा उपलब्ध कराने की मांग की है। बताया गया कि उपचार को लेकर घायल शेख इसराइल शेख साबुद्दीन और अस्पताल कर्मचारियों के बीच विवाद हुआ था इसके बाद रात करीब 11 बजे 15 से 20 लोगों का एक समूह लोहे की रॉड और धारदार हथियारों के साथ अस्पताल परिसर में घुस आया।
आरोप है कि हमलावरों ने कर्मचारियों को धमकाया, अस्पताल में तोड़फोड़ की और कांच तोड़ दिए। ड्यूटी पर मौजूद अधिकारियों व कर्मचारियों को जान से मारने की धमकी देने के साथ कुछ कर्मचारियों के साथ लोहे की रॉड से मारपीट भी की गई, जिससे उन्हें गंभीर चोटें आईं। घटना के बाद डॉक्टर और कर्मचारी भयभीत हो गए, जिसके कारण अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाएं सुबह चार बजे तक प्रभावित रहीं। इसका सीधा असर उपचार के लिए पहुंचे मरीजों और उनके परिजनों पर पड़ा। 19 अगस्त को तहसीलदार अभय मसके ने महागांव ग्रामीण अस्पताल पहुंचकर घटना स्थल का निरीक्षण किया और डॉक्टरों, महिला डॉक्टरों तथा कर्मचारियों से बातचीत कर उनकी समस्याएं जानीं।
उन्होंने पुलिस प्रशासन को हमलावरों की तत्काल तलाश कर उन्हें गिरफ्तार करने के निर्देश दिए। महागांव की घटना के विरोध में 20 अगस्त को महाराष्ट्र गवर्नमेंट नर्सेस फेडरेशन के नेतृत्व में यवतमाल के वसंतराव नाईक शासकीय वैद्यकीय महाविद्यालय में सुबह 7।30 से 9।30 बजे तक दो घंटे का कामबंद आंदोलन किया गया। वहीं जिले के ग्रामीण और उपजिला अस्पतालों में दिनभर आंदोलन जारी रहा। आंदोलनकारियों ने नर्सिंग कर्मचारियों के कार्यक्षेत्र में 24 घंटे सुरक्षा गार्डों की तत्काल नियुक्ति करने की प्रमुख मांग रखी। चेतावनी दी गई कि आरोपियों पर शीघ्र कार्रवाई कर अस्पताल कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की गई तो आगे बेमियादी हड़ताल शुरू की जाएगी। आंदोलन में जीएमसी नर्सेस अध्यक्ष शोभा खडसे, आशीष मानकर, अमोल खाडे, इंदूताई भाकरे, सुनीता कलसकर, अलका गिरी, छाया मोरे, नंदा साबले, अनिता कुनगर, इंदिरा राठोड, रुपाली तनपुरे, विद्या राठोड, सुजाता धवने आदि शामिल हुए।
उमरखेड़। महागांव ग्रामीण अस्पताल में ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर, स्वास्थ्य कर्मचारी और नर्सों के साथ हुई मारपीट एवं अभद्र व्यवहार की घटना के विरोध में महाराष्ट्र गवर्नमेंट नर्सेस एसोसिएशन, उमरखेड़ उपजिला अस्पताल की ओर से कड़ा निषेध व्यक्त किया गया। इस संबंध में एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने उमरखेड़ के उपविभागीय अधिकारी सखाराम मुले को विभिन्न मांगों का ज्ञापन सौंपा। स्वास्थ्य कर्मियों ने कहा कि इस प्रकार की घटनाओं से अस्पतालों में काम करने वाले डॉक्टरों, नर्सों और कर्मचारियों में भय का वातावरण निर्माण हो रहा है। इसलिए सरकार को स्वास्थ्य कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए प्रभावी कदम उठाने चाहिए। एसोसिएशन ने उपजिला अस्पताल में सीसीटीवी कैमरे लगाने, स्वतंत्र पुलिस चौकी शुरू करने, अस्पताल परिसर में नियमित पुलिस गश्त कराने और स्वास्थ्य कर्मियों को सुरक्षा सुविधा उपलब्ध कराने की मांग की है।
दिग्रस, महागांव ग्रामीण अस्पताल में डॉक्टरों व नर्सों के साथ हुई कथित घटना के विरोध में दिग्रस ग्रामीण अस्पताल के चिकित्सा अधिकारियों, नर्सों और कर्मचारियों ने गुरुवार को काली पट्टी बांधकर मौन आंदोलन किया। कर्मचारियों ने अस्पतालों में स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग की।आंदोलन के दौरान ओपीडी और औषधी सेवा प्रभावित रही, जबकि आपातकालीन व गंभीर मरीजों की सेवाएं जारी रखी गई। आंदोलनकारियों ने अस्पताल में पर्याप्त सुरक्षा गार्ड, सीसीटीवी कैमरे, पुलिस की त्वरित सहायता तथा स्वास्थ्यकर्मियों के साथ दुर्व्यवहार करने वालों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की। कर्मचारियों ने कहा कि मरीजों की सेवा के लिए सुरक्षित कार्यस्थल आवश्यक है और प्रशासन को स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए।