Bhandara Mahavitaran Prepaid Meter Installation Campaign: नई तकनीक के माध्यम से बिजली की खपत पर प्रभावी नियंत्रण रखने के उद्देश्य से महावितरण की ओर से भंडारा जिले में स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाने का अभियान युद्धस्तर पर चलाया जा रहा है। 'बचत का दावा, स्मार्ट तकनीक का उपयोग' के नारे के साथ शुरू हुई यह महत्वाकांक्षी योजना अब धरातल पर उतर रही है। भंडारा जिले में अब तक कुल 1 लाख 37 हजार 784 स्मार्ट मीटर सफलतापूर्वक लगाए जा चुके हैं।
बीच के दिनों में प्रीपेड की अवधारणा को लेकर उपभोक्ताओं में फैले कुछ तकनीकी भ्रम और विरोध के कारण यह अभियान कुछ समय के लिए धीमा हो गया था, लेकिन अब महावितरण की ओर से उपभोक्ताओं की आपसी सहमति से इस मुहिम को दोबारा तेज कर दिया गया है।
महावितरण की इस मुहिम के तहत नए बिजली कनेक्शन लेने वाले उपभोक्ताओं को अब सीधे ये डिजिटल स्मार्ट मीटर ही दिए जा रहे हैं। इसके अलावा, पुराने व तकनीकी रूप से खराब हो चुके मीटरों को बदलकर उनकी जगह प्राथमिकता के आधार पर नए स्मार्ट मीटर लगाए जा रहे हैं। महावितरण की मूल योजना के अनुसार, कम दाब उपभोक्ताओं की सभी श्रेणियों के लिए कुल 3 लाख 9 हजार 676 स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाने का लक्ष्य तय किया गया था। इस योजना में से केवल कृषि पंपधारकों को फिलहाल के लिए बाहर रखा गया है, जबकि घरेलू व औद्योगिक उपभोक्ताओं के लिए इस मीटर को लगाना पूरी तरह से अनिवार्य कर दिया गया है।
इस अभियान की विशेष बात यह है कि भंडारा जिले के विभिन्न सरकारी कार्यालयों में अब तक 9 हजार 271 स्मार्ट मीटर सफलतापूर्वक लगाए जा चुके हैं। जिले में वर्तमान में 'किम्बल' कंपनी की ओर से निर्मित स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाए जा रहे हैं और इसके इंस्टॉलेशन का ठेका मेसर्स मोंटेकालों लिमिटेड कंपनी को दिया गया है। ये आधुनिक मीटर आरएफ और सेलुलर तकनीक पर काम करते हैं। इसके जरिए बिजली खपत की रीडिंग डीसीयू गेटवे के माध्यम से स्वचालित रूप से सीधे ऑनलाइन दर्ज हो जाती है। इसके बाद उपभोक्ताओं को मोबाइल ऐप या ऑनलाइन पोर्टल पर अपनी दैनिक बिजली की खपत, बिल और शेष राशि की सटीक जानकारी मिलती रहती है। वर्तमान में जिले में कुल बिजली उपभोक्ताओं की संख्या 3,76,116 है।
भंडारा जिले के ग्रामीण इलाकों में शुरुआत में यह भ्रामक बात फैल गई थी कि पैसे खत्म होते ही तुरंत बिजली काट दी जाएगी या इस तकनीक से बिजली महंगी हो जाएगी। हालांकि, इस पर महावितरण ने पूरी स्थिति साफ करते हुए कहा है कि यह मीटर उपभोक्ताओं के लिए पूरी तरह से मुफ्त हैं और भविष्य में खराब होने पर इन्हें बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के बदला जाएगा।
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इसके साथ ही, उपभोक्ताओं की सुविधा के लिए पुरानी बिलिंग पद्धति ऑनलाइन और हार्ड कॉपी, दोनों रूपों में पहले की तरह ही जारी रहेगी। इस स्पष्टीकरण के बाद अब धीरे-धीरे जनविरोध कम हो रहा है, फिर भी महावितरण को जमीनी स्तर पर तकनीकी जानकारी देकर व्यापक जन जागरूकता अभियान चलाने और अपने काम में अधिक पारदर्शिता लाने की निरंतर आवश्यकता बनी हुई है।