धोप गांव के किसान राजेंद्र सपाटे की आत्महत्या के मामले में राजनीतिक आक्रोश।
शिवसेना (UBT) ने पालकमंत्री पंकज भोयर और संबंधित अधिकारियों पर FIR की मांग की।
मृतक किसान के परिवार को 1 करोड़ रुपये और बेटे को सरकारी नौकरी देने की मांग।
भंडारा जिले की सात तहसीलों में से चार को सूखा राहत से बाहर रखने पर सवाल।
जिला प्रमुख संजय रेहपाडे ने मुख्यमंत्री से पालकमंत्री को पद से हटाने की मांग की।
Bhandara Farmer Suicide Outrage: भंडारा, मोहाड़ी तहसील के धोप गांव के कर्जग्रस्त किसान राजेंद्र सपाटे की आत्महत्या के मामले में राजनीतिक माहौल गरमा गया है। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के जिला प्रमुख संजय रेहपाडे ने पत्र परिषद में राज्य सरकार और प्रशासन पर सवाल उठाए।
उन्होंने पालकमंत्री पंकज भोयर तथा संबंधित अधिकारियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 306 के तहत मामला दर्ज करने की मांग की।
रेहपाडे ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार ने 358 तहसीलों में से 265 को सूखाग्रस्त घोषित किया है, लेकिन भंडारा जिले की सात तहसीलों में से केवल भंडारा, पवनी और लाखांदूर को ही इसमें शामिल किया गया। उनके अनुसार, मोहाड़ी, तुमसर, लाखनी और साकोली की स्थिति भी समान होने के बावजूद इन तहसीलों को राहत से बाहर रखा गया।
उन्होंने कहा कि सूखे और कृषि संकट से जूझ रहे किसानों को राहत नहीं मिलने से उनकी परेशानी बढ़ रही है। पार्टी ने सरकार से प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति पर पुनर्विचार करने की मांग की।
शिवसेना (UBT) के संजय रेहपाडे के अनुसार, जिले के दौरे के दौरान किसान राजेंद्र सपाटे ने पालकमंत्री पंकज भोयर से मुलाकात कर अपनी व्यथा बताई थी। उन्होंने मंत्री से खेत और नहर की स्थिति देखने का अनुरोध भी किया था।
रेहपाडे का आरोप है कि इसके बावजूद संबंधित अधिकारियों से संपर्क नहीं किया गया और खेत का दौरा भी नहीं हुआ। इसके बाद किसान ने कुएं में कूदकर आत्महत्या कर ली। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। किसान की आत्महत्या की परिस्थितियों और उससे जुड़े घटनाक्रम के बारे में उपलब्ध जानकारी से आगे निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।
शिवसेना (UBT) ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से पालकमंत्री पंकज भोयर को मंत्रिपद से हटाने और संबंधित अधिकारियों को निलंबित करने की मांग की। पार्टी ने मृतक किसान के परिवार को 1 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता देने तथा उनके बेटे को सरकारी नौकरी देने की भी मांग रखी।
पत्र परिषद में सुधाकर कारेमोरे, तिलक सार्वे, राकेश आग्रे और मयूर जोशी उपस्थित थे। अब इस मामले में सरकार और प्रशासन की ओर से आने वाली प्रतिक्रिया पर नजर रहेगी।