Bhandara Court Tender Scam : भंडारा में नए जिला एवं सत्र न्यायालय भवन के निर्माण की करोड़ों रुपये की निविदा प्रक्रिया सवालों के घेरे में आ गई है।
सांसद डॉ. प्रशांत पड़ोले ने ठेकेदार एस. जी. मोटवानी द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों और साझेदारी से जुड़े कागजात में कथित विसंगतियों का दावा किया है। उन्होंने शासन और सार्वजनिक निर्माण विभाग से मामले की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच की मांग की है।
भंडारा में नए जिला एवं सत्र न्यायालय भवन के जी प्लस फोर निर्माण की निविदा प्रक्रिया को लेकर सांसद डॉ. प्रशांत पड़ोले ने गंभीर सवाल उठाए हैं। पत्रकार वार्ता में उन्होंने ठेकेदार एस. जी. मोटवानी द्वारा निविदा के लिए प्रस्तुत किए गए दस्तावेजों, साझेदारी तथा संयुक्त उपक्रम से संबंधित कागजात में कथित त्रुटियों और विसंगतियों का दावा किया।
डॉ. पड़ोले के अनुसार, उन्होंने निविदा प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेजों का अध्ययन करने के बाद संबंधित प्रमाणों के आधार पर आपत्तियां दर्ज कराई हैं। उनका कहना है कि यह मामला केवल मौखिक आरोपों तक सीमित नहीं है, बल्कि दस्तावेजों के साथ सक्षम अधिकारियों के समक्ष शिकायत प्रस्तुत की गई है।
सांसद ने बताया कि निविदा से संबंधित दस्तावेज और उनके आधार पर तैयार की गई आपत्तियां मंत्री, मुख्य अभियंता, अधीक्षण अभियंता तथा कार्यकारी अभियंता को सौंप दी गई हैं। अब मामले की जांच करना शासन और सार्वजनिक निर्माण विभाग की जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि करोड़ों रुपये के सार्वजनिक धन से होने वाले निर्माण कार्यों में निविदा की शर्तों और पात्रता नियमों का कड़ाई से पालन होना जरूरी है। निविदा प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं होने की स्थिति में सार्वजनिक धन के इस्तेमाल को लेकर सवाल खड़े हो सकते हैं।
डॉ. प्रशांत पड़ोले ने कहा कि किसी व्यक्ति या कंपनी को पूर्वाग्रह के आधार पर दोषी ठहराना उनका उद्देश्य नहीं है। उनका कहना है कि वास्तविक स्थिति निष्पक्ष जांच के बाद ही स्पष्ट होगी। यदि निविदा में प्रस्तुत किए गए सभी दस्तावेज सही और कानूनी हैं, तो जांच के माध्यम से इसे स्पष्ट किया जाना चाहिए।
उन्होंने संबंधित कागजात में बताई गई विसंगतियों की गहन जांच की मांग की है। साथ ही कहा कि यदि जांच में दस्तावेज फर्जी या नियमों के विपरीत पाए जाते हैं, तो नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
सांसद ने कहा कि निविदा प्रक्रिया पारदर्शिता और सार्वजनिक धन की सुरक्षा महत्वपूर्ण है। इसलिए जब तक मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच नहीं हो जाती, तब तक वह इस मुद्दे को उठाते रहेंगे।अब संबंधित विभाग की जांच और उसके निष्कर्षों से ही यह स्पष्ट होगा कि निविदा प्रक्रिया में लगाए गए आरोपों में कितनी वास्तविकता है।