डिजिटल भारत के नाम पर जेब पर डाका? UPI शुल्क को लेकर सुप्रिया सुले का केंद्र पर निशाना

Maharashtra Politics News: NCP सांसद सुप्रिया सुले ने केंद्र की डिजिटल भुगतान अधिसूचना पर सवाल उठाते हुए कहा कि ₹2,000 से अधिक के यूपीआई लेनदेन पर शुल्क का बोझ जनता पर पड़ेगा।
Supriya Sule attacks the Centre over UPI transaction charges
सुप्रिया सुले, जितेंद्र आव्हाड सोर्स- सोशल मीडिया
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UPI Transaction Fee Supriya Sule: केंद्र सरकार की डिजिटल भुगतान संबंधी अधिसूचना 'डिजिटल भारत' की दिशा में उठाया गया कदम है या लोगों की जेब पर डाला गया बोझ ? राकांपा (शरद गुट) की सांसद सुप्रिया सुले ने यह सवाल उठाया है।

उन्होंने आशंका जताई कि 2 हजार रुपये तक के यूपीआई लेन-देन और रुपे डेबिट कार्ड पर शुल्क नहीं लगाने की बात के बावजूद 2 हजार रुपये से अधिक के डिजिटल लेन-देन पर शुल्क वसूलने का रास्ता खोला जा सकता है।

सुले ने कहा कि देश में करोड़ों लोग, व्यापारी, किसान और मध्यमवर्गीय परिवार डिजिटल भुगतान पर निर्भर हैं। ऐसे में बड़े लेन-देन पर शुल्क शुरू होने या व्यापारियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ने पर इसका अप्रत्यक्ष असर ग्राहकों पर पड़ सकता है।

व्यापारियों का बढ़ा हुआ खर्च यदि वस्तुओं की कीमतों के जरिए ग्राहकों से वसूला गया, तो महंगाई का अतिरिक्त बोझ भी आम लोगों पर पड़ने की आशंका है।

उन्होंने कहा कि एक ओर सरकार देश को नकदी रहित अर्थव्यवस्था की ओर ले जाने पर जोर देती है और दूसरी ओर लोगों के डिजिटल भुगतान के आदी हो जाने के बाद छिपे हुए शुल्क लगाने की कोशिश की जाती है, तो यह नीति उचित नहीं है।

Supriya Sule attacks the Centre over UPI transaction charges
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जेब काटना, लेकिन एहसास नहीं होने देना

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी विधायक जितेंद्र आव्हाड ने कहा कि यूपीआई को निःशुल्क बताया जाता है, लेकिन इसका खर्च कौन उठाता है, यह सवाल महत्वपूर्ण है।

यदि व्यापारियों पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) लागू किया जाता है, तो उसका अंतिम भार ग्राहकों पर पड़ सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह लोगों की जेब काटने और उसका एहसास नहीं होने देने जैसा है।

डिजिटल लेन-देन की लागत बढ़ाने की कोशिश : खडसे

NCP की महिला प्रदेशाध्यक्ष रोहिणी खडसे ने भी इस मुद्दे पर केंद्र सरकार की जमकर आलोचना की। उन्होंने कहा कि एक ओर 'डिजिटल इंडिया' का प्रचार किया जाता है और दूसरी ओर डिजिटल लेन-देन की लागत बढ़ाने की कोशिश की जा रही है।

उन्होंने सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि अब लोग यही कहेंगे- सोचते थे कि वो कितने मासूम हैं, क्या से क्या हो गए देखते-देखते।