तथाकथित पाकिस्तान-चीन सीमा संयुक्त आयोग की पहली बैठक, भारत ने किया खारिज; कहा- कोई कानूनी आधार नहीं

Pakistan-China Boundary Joint Commission: इस्लामाबाद में तथाकथित "पाकिस्तान-चीन सीमा संयुक्त आयोग" की बैठक के कुछ घंटों बाद विदेश मंत्रालय ने भारत का पक्ष स्पष्ट करते हुए कहा कि कोई कानूनी आधार नहीं।
India Rejects Pakistan-China Boundary Commission
पीएम शहबाज शरीफ और शी जिनपिंगसोर्स- IANS
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India Rejects Pakistan-China Boundary Commission: भारत ने बुधवार को चीन और पाकिस्तान द्वारा बनाई गई सीमा संयुक्त आयोग को खारिज कर दिया। भारत का कहना है कि इस आयोग का कोई कानूनी आधार नहीं है और इस्लामाबाद भारत के उस इलाके के बारे में कोई अंतिम फैसला नहीं ले सकता जो उसके अवैध कब्जे में है। इस्लामाबाद में तथाकथित "पाकिस्तान-चीन सीमा संयुक्त आयोग" की पहली बैठक के कुछ घंटों बाद विदेश मंत्रालय ने भारत का पक्ष स्पष्ट किया। इस बैठक में सीमा प्रबंधन, संयुक्त सीमा सर्वेक्षण और व्यापार में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की गई।

CPEC का भी विरोध किया है

भारत लंबे समय से पाकिस्तान पर 1947-48 के युद्ध के बाद से जम्मू-कश्मीर राज्य के कुछ हिस्सों पर कब्जा करने का आरोप लगाता रहा है। भारत ने पाकिस्तान पर अक्साई चिन और शक्सगाम घाटी जैसे इलाकों को गैर-कानूनी तरीके से चीन को सौंपने का भी आरोप लगाया है। नई दिल्ली ने चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) का भी विरोध किया है, क्योंकि इसका एक हिस्सा पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर से होकर गुजरता है।

विदेश मंत्रालय ने जारी किया बयान

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने पाकिस्तान-चीन सीमा संयुक्त आयोग का ज़िक्र करते हुए कहा, "इस मामले पर हमारा रुख़ साफ और एक जैसा है। पाकिस्तान और चीन के बीच कोई सीमा नहीं है। हम तथाकथित संयुक्त आयोग को खारिज करते हैं, जिसका कोई कानूनी आधार नहीं है।" उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के पूरे केंद्र-शासित प्रदेश, भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा रहे हैं, और हमेशा रहेंगे। उन्होंने आगे कहा कि पाकिस्तान को भारत के उस इलाके के बारे में कोई भी समझौता करने का कोई अधिकार नहीं है।

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भारत ने समझौते का जिक्र किया

जायसवाल ने उस समझौते का जिक्र करते हुए कहा कि भारत ने "1963 के तथाकथित 'चीन-पाकिस्तान सीमा समझौते' को कभी मान्यता नहीं दी" और हमेशा यही कहा है कि यह "गैर-कानूनी और अमान्य" है। इस समझौते के तहत पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर के कुछ हिस्से चीन को सौंप दिए थे। विदेश मंत्रालय ने कहा, "हम इन कब्ज़े वाले इलाकों की स्थिति बदलने या गैर-कानूनी कब्जे को जायज ठहराने की किसी भी कोशिश का कड़ा विरोध और उसे खारिज करते हैं। भारत ने स्पष्ट किया कि इससे भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता पर असर पड़ता है।

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