मस्साजोग सरपंच उपचुनाव में जीत के बाद जश्न मनाते स्वरूपानंद देशमुख व उनके समर्थक (सोर्स: सोशल मीडिया) 
बीड

संतोष देशमुख हत्याकांड के बाद मस्साजोग उपचुनाव में बड़ा उलटफेर, सहानुभूति भी नहीं दिला पाई पत्नी को जीत

Massajog Sarpanch By-Election Results: बीड के मस्साजोग गांव में हुए हाई-प्रोफाइल सरपंच उपचुनाव में दिवंगत सरपंच संतोष देशमुख की पत्नी अश्विनी देशमुख को हार का सामना करना पड़ा है।

आकाश मसने

Swaroopananand Deshmukh Wins Massajog Sarpanch By-Election: महाराष्ट्र के बीड जिले के कैज तालुका के अंतर्गत आने वाला मस्साजोग गांव एक बार फिर सुर्खियों में है। बहुचर्चित संतोष देशमुख हत्याकांड के बाद खाली हुई सरपंच की सीट पर हुए उपचुनाव के नतीजे घोषित कर दिए गए हैं। इस चुनाव में वह सहानुभूति कार्ड काम नहीं आया जिसकी उम्मीद राजनीतिक पंडित लगा रहे थे। दिवंगत सरपंच संतोष देशमुख की पत्नी अश्विनी संतोष देशमुख को इस चुनाव में हार का सामना करना पड़ा है, जबकि उनके प्रतिद्वंद्वी स्वरूपानंद देशमुख ने 92 मतों के अंतर से एक बड़ी जीत हासिल की है।

मस्साजोग में कैसे बदले राजनीतिक समीकरण

बता दें कि मस्साजोग के तत्कालीन लोकप्रिय सरपंच संतोष देशमुख की 9 दिसंबर 2024 को बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। इस घटना ने न केवल गांव बल्कि पूरे महाराष्ट्र को हिलाकर रख दिया था। संतोष देशमुख के प्रति सम्मान प्रकट करने के लिए ग्रामीणों के एक वर्ग ने मांग की थी कि यह चुनाव निर्विरोध हो और उनकी पत्नी को ही पद सौंपा जाए। हालांकि, स्वरूपानंद देशमुख ने चुनाव लड़ने का फैसला किया और नामांकन वापस नहीं लिया, जिससे मुकाबला दिलचस्प हो गया।

अश्विनी देशमुख को नहीं मिले पाए सहानुभूति के वोट

शुरुआती रुझानों में माना जा रहा था कि अश्विनी देशमुख को अपने पति के निधन के कारण बड़े पैमाने पर सहानुभूति वोट मिलेंगे। लेकिन नतीजों ने स्पष्ट कर दिया कि मतदाताओं ने सहानुभूति के बजाय अन्य स्थानीय मुद्दों और नेतृत्व की क्षमता को प्राथमिकता दी। स्वरूपानंद देशमुख ने जमीनी स्तर पर अपनी पकड़ मजबूत की और मतदाताओं का भरोसा जीतने में सफल रहे।

संतोष देशमुख व अश्विनी देशमुख (सोर्स: साेशल मीडिया)

रिकॉर्ड मतदान और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम

प्रशासनिक आंकड़ों के अनुसार, मस्साजोग गांव में इस बार रिकॉर्ड मतदान हुआ। कुल 2,284 पंजीकृत मतदाताओं में से 84 प्रतिशत ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। यह पिछले चुनाव की तुलना में 10 प्रतिशत अधिक है। चुनाव आयोग और पुलिस प्रशासन ने संवेदनशीलता को देखते हुए गांव में भारी सुरक्षा बल तैनात किया था। मामूली नोकझोंक को छोड़कर मतदान और मतगणना की प्रक्रिया पूरी तरह शांतिपूर्ण रही।

जीत की घोषणा के बाद स्वरूपानंद देशमुख के समर्थकों ने गुलाल उड़ाकर और नारेबाजी कर जीत का जश्न मनाया। यह जीत बीड की स्थानीय राजनीति में एक नया मोड़ मानी जा रही है।

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