संतोष देशमुख हत्याकांड की शिकायत वापस लो वरना... जेल से बाहर आते ही दादासाहेब खिंडकर ने किया सनसनीखेज दावा

Santosh Deshmukh Murder Case: बीड के सरपंच संतोष देशमुख हत्याकांड में नया मोड का आ गया है। दादासाहेब खिंडकर ने जेल से बाहर आने के बाद बड़ा खुलासा किया है।
Dadasaheb Khindkar Claims Santosh Deshmukh Case
संतोष देखमुख व दादासाहेब खिंडकर (सोर्स: सोशल मीडिया)
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Dadasaheb Khindkar Claims Santosh Deshmukh Case: महाराष्ट्र के बीड जिले के मस्साजोग गांव के चर्चित सरपंच संतोष देशमुख हत्याकांड मामले में एक नया और चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है। करीब 13 महीने जेल में बिताने के बाद बाहर आए दादासाहेब खिंडकर ने विरोधियों पर उन्हें झूठे केस में फंसाने का सीधा आरोप लगाया है। खिंडकर का दावा है कि उन्हें केवल इसलिए निशाना बनाया गया ताकि संतोष देशमुख की हत्या के मामले को दबाया जा सके।

स्वागत के बीच दादासाहेब खिंडकर बड़ा खुलासा

जेल से रिहा होने के बाद दादासाहेब खिंडकर का उनके समर्थकों ने आतिशबाजी और पुष्पगुच्छ देकर भव्य स्वागत किया। इस दौरान मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि जिस मारपीट के वीडियो के आधार पर उन्हें जेल भेजा गया, वह काफी पुराना था। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ असामाजिक तत्वों ने नशे की हालत में उन पर झूठा मुकदमा दर्ज करवाया। दादासाहेब खिंडकर, संतोष देशमुख के भाई धनंजय देशमुख के साढू है।

शिकायत वापस लेने का बनाया गया दबाव

दादासाहेब खिंडकर ने सनसनीखेज दावा करते हुए कहा कि जब मैं जेल में था, तब शिकायतकर्ताओं ने धनंजय देशमुख के सामने एक सौदा रखा। उन्होंने कहा कि अगर दादासाहेब खिंडकर को छुड़ाना है, तो संतोष देशमुख हत्याकांड की शिकायत वापस ले लो। खिंडकर के मुताबिक, यह पूरी साजिश इस बड़े मर्डर केस से ध्यान भटकाने और आरोपियों को बचाने के लिए रची गई थी।

राजनीतिक संरक्षण का आरोप

उन्होंने आगे कहा कि गांव में कई लोगों के साथ मारपीट की गई है और इसके वीडियो पुलिस को भी दिए गए हैं, लेकिन राजनीतिक दबाव के कारण दोषियों पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। खिंडकर ने स्पष्ट किया कि उनके पीछे एक बड़ी राजनीतिक शक्ति हाथ धोकर पड़ी है, जो ग्रामीणों को डराने-धमकाने का काम कर रही है।

लड़ाई जारी रखने का संकल्प

जेल से बाहर आने के बाद उनके भव्य स्वागत पर सफाई देते हुए उन्होंने कहा कि 1 मार्च को उनका जन्मदिन था, जिसे वे जेल में होने के कारण नहीं मना सके थे। इसलिए उनके मित्रों और शुभचिंतकों ने यह उत्साह दिखाया। उन्होंने अंत में भावुक होते हुए कहा कि वे देशमुख परिवार के साथ मजबूती से खड़े हैं और चाहे जान चली जाए, वे न्याय की इस लड़ाई से पीछे नहीं हटेंगे।

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