Sambhajinagar Healthcare Project Replaces Memorial Plan: कभी राजनीतिक विवाद और तीखी आलोचनाओं का कारण बनी मांग आखिरकार साकार होने की ओर बढ़ गई है। शहर के मध्य स्थित बहुमूल्य सरकारी भूमि पर गोपीनाथ मुंडे स्मारक बनाने के प्रस्ताव का विरोध करते हुए महिला एवं नवजात शिशु अस्पताल की मांग उठाने वाले पूर्व सांसद इम्तियाज जलील की नौ वर्षों की लड़ाई को सफलता मिल गई है। अब इसी भूमि पर 400 बिस्तरों वाला अत्याधुनिक महिला एवं बाल अस्पताल स्थापित किया जाएगा।
वर्ष 2016 में जब सरकार ने पूर्व उपमुख्यमंत्री गोपीनाथ मुंडे के स्मारक के लिए शहर के प्रमुख स्थान पर जमीन उपलब्ध कराने का निर्णय लिया था, तब तत्कालीन विधायक इम्तियाज जलील ने इसका विरोध किया था। उनका कहना था कि स्मारकों की तुलना में महिलाओं और नवजात शिशुओं के लिए अस्पताल की आवश्यकता अधिक है। उस समय उनके इस रुख को लेकर राजनीतिक विरोध हुआ और उन्हें निशाना भी बनाया गया।
भूमि उपलब्ध नहीं होने के कारण वर्ष 2013 में स्वीकृत महिला एवं बाल अस्पताल परियोजना वर्षों तक अटकी रही। इसके बाद इम्तियाज जलील ने वर्ष 2017 में उच्च न्यायालय की औरंगाबाद पीठ में जनहित याचिका दायर की। न्यायालय के हस्तक्षेप के बाद प्रशासन सक्रिय हुआ और सरकारी दुध डेयरी परिसर की लगभग 21,853 वर्गमीटर भूमि अस्पताल के लिए आरक्षित की गई। इसके बाद राज्य सरकार ने परियोजना को मंजूरी देते हुए 400 बिस्तरों वाले अस्पताल के निर्माण की प्रक्रिया शुरू की।
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इम्तियाज जलील ने कहा कि यह किसी व्यक्ति की नहीं, बल्कि माताओं और बच्चों के स्वास्थ्य की जीत है। उन्होंने कहा कि जब उन्होंने स्मारक के बजाय अस्पताल की मांग उठाई थी, तब उन्हें 'विरोधी' और 'खलनायक' तक कहा गया था, लेकिन आज वही संघर्ष लाखों महिलाओं और बच्चों के लिए बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं का आधार बन रहा है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि इस अस्पताल के शुरू होने से मराठवाड़ा के आठ जिलों की महिलाओं और नवजात शिशुओं को विशेष उपचार के लिए दूर-दराज के शहरों का रुख नहीं करना पड़ेगा। इससे सरकारी चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल पर पड़ने वाला भार भी कम होगा।
– नवभारत लाइव के लिए छत्रपति संभाजीनगर से शफीउल्ला हुसैनी की रिपोर्ट