

Abhijeet Dipke Demand Gyanesh Kumar Resignation: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संयोजक अभिजीत दिपके ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की है। उन्होंने अगले 48 घंटे में इस्तीफा देने के लिए समय दिया है। साथ ही दिपके ने कहा है कि अगर इस्तीफा नहीं देते हैं तो सीजेपी देशव्यापी आंदोलन चलाएगी।
अभिजीत दिपके ने शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक पोस्ट करते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग उठाई है। उन्होंने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि ज्ञानेश कुमार कल तक अपने पद से इस्तीफा नहीं देते हैं, तो कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) 2 अक्टूबर यानी गांधी जयंती से एक व्यापक और उग्र देशव्यापी आंदोलन की शुरुआत करेगा।
अभिजीत दिपके के अनुसार, इस आंदोलन की शुरुआत महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई से हाेगी। मुंबई में एक विशाल विरोध प्रदर्शन के बाद इस मुहिम को देश के अन्य प्रमुख राज्यों और शहरों तक फैलाया जाएगा।अभिजीत दिपके ने अपने पोस्ट में देशवासियों से अपील करते हुए कहा, "आइए, इस गांधी जयंती पर लोकतंत्र को बचाने का संकल्प लें।"
CJP के अभिजीत दिपके ने तीन मांगें उठाते हुए कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को तत्काल इस्तीफा होना चाहिए। साथ ही उनके खिलाफ आपराधिक मुकदमा चलाया जाना चाहिए।
काॅकरोच जनता पार्टी की दूसरी मांग है कि आगामी सभी चुनावों पर रोक लगा दी जानी चाहिए। 2024 की वोटर लिस्ट को तत्काल प्रभाव से बहाल किया जाना चाहिए और एसआईआर प्रक्रिया रोक देनी चाहिए।
CJP की तीसरी मांग है कि 2023 के कानून के तहत चुनाव आयुक्तों को मिलने वाली कानूनी कार्रवाई से संरक्षण वाले कानून को वापस लिया जाना चाहिए। नया कानून बनाया जाना चाहिए, जिसमें सिविल सोसाइटी भी शामिल हो।
चुनाव आयोग के अंदर वोटर लिस्ट से जुड़े कुछ फैसलों को लेकर मतभेद सामने आए हैं। अंग्रेजी अखबार द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में आयोग के निर्णयों और आदेशों को लेकर कम से कम 14 बार लिखित आपत्तियां दर्ज कराने की बात कही है। इनमें कुछ आपत्तियां सीधे इस बात से संबंधित थीं कि निर्णय या आदेश उनकी जानकारी अथवा स्वीकृति के बिना जारी किए गए। यही नहीं एक ही दिन में 4-4 आपत्तियां दर्ज होने की बात भी सामने आई है।
कानून के मुताबिक चुनाव आयोग के कामकाज में जहां तक संभव हो, सर्वसम्मति का प्रयास किया जाए और मतभेद होने पर बहुमत का निर्णय माना जाए। इस व्यवस्था के बावजूद 2 चुनाव आयुक्तों का आरोप है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने मनमाने निर्णय किए।