छत्रपति संभाजीनगर महानगरपालिका (सोर्स: सोशल मीडिया) 
औरंगाबाद

छत्रपति संभाजीनगर में बड़ा सियासी भूचाल: 23 पार्षदों की सदस्यता पर मंडराया खतरा, AIMIM और BJP को झटका

Chhatrapati Sambhajinagar News: छत्रपति संभाजीनगर महानगरपालिका ने 23 पार्षदों को अयोग्यता का नोटिस थमाया है। इससे AIMIM और भाजपा के कई दिग्गजों की सदस्यता खतरे में है।

आकाश मसने

Chhatrapati Sambhajinagar Corporators Disqualification Notice: महाराष्ट्र की छत्रपति संभाजीनगर महानगरपालिका की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। महानगरपालिका प्रशासन ने 23 पार्षदों को अयोग्यता का नोटिस जारी किया है, जिससे उनके पार्षद पद पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। प्रशासन के इस कड़े रुख से जहां एक तरफ कई मौजूदा जनप्रतिनिधियों के पार्षद पद पर अनिश्चितता के बादल मंडराने लगे हैं।

इस कार्रवाई से सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी और मुख्य विपक्षी दल ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) को करारा झटका लगा है। वहीं शहर के राजनीतिक समीकरणों में बदलाव की संभावना जताई जा रही है।

चुनाव में हारे प्रत्याशियों की शिकायत पर बड़ी कार्रवाई

यह पूरा मामला छत्रपति संभाजीनगर महानगरपालिका चुनाव में पराजित हुए उम्मीदवारों द्वारा दर्ज कराई गई शिकायतों के बाद गरमाया है। पराजित प्रत्याशियों ने महाराष्ट्र महानगरपालिका अधिनियम, 1949 की धारा 10(ड-1) के तहत इन पार्षदों को पद से अयोग्य घोषित करने के लिए याचिकाएं दायर की थीं। शिकायतों में मुख्य रूप से दो से अधिक संतान होना, संपत्तियों पर अवैध निर्माण कराना और सरकारी भूमि पर अतिक्रमण जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं।

छत्रपति संभाजीनगर प्रशासन ने जारी किया 37 नोटिस

शुक्रवार को छत्रपति संभाजीनगर प्रशासन ने कुल 37 नोटिस जारी किए, जिनमें 23 पार्षद शामिल हैं. इनमें सबसे अधिक 16 पार्षद AIMIM के हैं। एआईएमआईएम के विपक्ष के नेता अब्दुल समीर साजिद को दो अलग-अलग नोटिस जारी किए गए हैं। वहीं भाजपा के 7 पार्षद भी कार्रवाई के दायरे में आए हैं, जिनमें गणेश नावंदर और जीवकपाल हिवराले प्रमुख हैं।

छत्रपति संभाजीनगर महानगरपालिका प्रशासन ने बताया कि शिकायतें मिलने के बाद नगर सचिव, जन्म-मृत्यु पंजीयन विभाग और अतिक्रमण विभाग द्वारा प्राथमिक जांच की गई। जांच रिपोर्ट के आधार पर संबंधित पार्षदों को नोटिस जारी कर अपना पक्ष रखने का अवसर दिया गया है।

अंतिम सुनवाई अगस्त और सितंबर में

इस मामले की अंतिम सुनवाई अगस्त और सितंबर में अलग-अलग तिथियों पर होगी। प्रशासन ने नोटिस में स्पष्ट किया है कि यदि संबंधित पार्षद आवश्यक दस्तावेजों के साथ उपस्थित होकर संतोषजनक जवाब नहीं देते हैं, तो उनके खिलाफ एकतरफा निर्णय लिया जा सकता है। यदि जांच के बाद 23 पार्षद अयोग्य घोषित किए जाते हैं, तो महानगरपालिका का संख्याबल प्रभावित होगा और भाजपा तथा एमआईएम दोनों को बड़ा राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। ऐसे में अब सभी की नजर प्रशासन की अंतिम सुनवाई पर टिकी हुई है।

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