Chhatrapati Sambhajinagar Teacher Salary Dispute ( सोर्स: सोशल मीडिया ) 
औरंगाबाद

औरंगाबाद खंडपीठ सख्त: 4 हफ्तों में जारी करें शालार्थ आईडी व बकाया वेतन, राज्यभर में गाइडलाइन लागू करने के आदेश

Shalarth ID Issue: शालार्थ ID दर्ज न होने से वर्षों बिना वेतन सेवा करने वाले शिक्षक के मामले में बॉम्बे HC की औरंगाबाद खंडपीठ ने 4 सप्ताह में ID जारी कर बकाया वेतन देने का आदेश दिया।

अंकिता पटेल

Chhatrapati Sambhajinagar Teacher Salary Dispute: छत्रपति संभाजीनगर नियुक्ति व अनुदानित पद पर तबादले को मंजूरी मिलने के बावजूद शालार्थ प्रणाली में नाम पंजीकृत नहीं कराए जाने से एक अध्यापक को लंबे समय बगैर वेतन सेवा करने के प्रकरण को बॉम्बे उच्च न्यायालय के औरंगाबाद खंडपीठ ने गंभीरता से लिया है।

न्या. विभा कंकणवाड़ी व न्या। हितेन वेणगांवकर ने संबंधित अधिकारियों को 4 सप्ताह के भीतर शालार्थ आईडी जारी करने, बकाया वेतन व आर्थिक लाभ देने, ऐसे प्रस्तावों पर निर्धारित समय सीमा के भीतर निर्णय लेने व पूरे राज्य में समान मार्गदर्शक तत्व लागू करने के निर्देश भी न्यायालय ने दिए हैं।

हिंगोली जिले के केली तांडा निवासी व वर्तमान में परभणी के जिंतूर स्थित अण्णाभाऊ साठे प्राथमिक स्कूल में कार्यरत अध्यापक विजय चव्हाण ने न्यायालय में याचिका दाखिल करते हुए कहा कि उनकी 22 जनवरी 2013 को बतौर शिक्षण सेवक नियुक्ति की गई थी।

21 जनवरी 2015 से सहायक शिक्षक के रूप में उनकी सेवा को मान्यता मिली। 31 जुलाई 2022 को एक अध्यापक के सेवानिवृत्त होने के बाद अनुदानित पद रिक्त हुआ।

जिंतूर के शिक्षकों को मिली राहत

इसके बाद स्कूल प्रबंधन ने उनकी बगैर बिना अनुदानित पद से अनुदानित पद पर तबादला किया व उसे शिक्षा अधिकारी की मंजूरी मिलने के बाद शालार्थ प्रणाली में पंजीयन के लिए प्रस्ताव भेजा गया, प्रस्ताव में कुछ खामियां दिखाकर विभागीय उपसंचालक ने वह वापस भेजने के बाद दस्तावेजों की पूर्ति कर 1 फरवरी 2024 को संशोधित प्रस्ताव फिर पेश किया गया, शिक्षण अधिकारी ने सकारात्मक टिप्पणी करते हुए वह अगली मंजूरी के लिए भेजा। हालांकि, उस पर लंबे समय तक निर्णय नहीं होने से संबंधित अध्यापक को वेतन नहीं मिल सका।

15 दिनों के भीतक प्राथमिक जांच करना जरूरी

शिक्षण विभाग के प्रस्तावों पर होने वाली देरी पर न्यायालय ने विता जताते हुए कहा कि प्रस्ताव मिलने के बाद 15 दिनों में प्राथमिक जांच करें। खामियां मिलने पर प्रबंधन को 15 दिनों की मोहलत देने व उसके 30 दिनों में अंतिम निर्णय लेने के आदेश भी दिए।

न्यायालय ने प्रस्ताव विभागीय उपसंचालक के पास सात दिनों में भेजने, वह मिलने पर 30 दिनों में उस पर निर्णय ले, कोई भी प्रस्ताथ 60 दिनों से अधिक समय तक लंबित नहीं रखा जाए, बिल्ला वजह विलंब होने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ प्रशासकीय कार्रवाई की चेतावनी भी न्यायालय ने दी। इन सूचनाओं के अनुसार दो महीनों में शासन निर्णय जारी करने का आदेश भी राज्य सरकार को दिया गया।

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