विप्लव बाजोरिया, सुप्रीम कोर्ट, (सोर्स: सोशल मीडिया) 
अमरावती

विप्लव बाजोरिया को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका! अमरावती निर्वाचन क्षेत्र मामले में दखल से इनकार, याचिका ली वापस

Amravati Election Case: अमरावती स्थानीय प्राधिकारी निर्वाचन क्षेत्र से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने हस्तक्षेप से इनकार कर दिया, जिसके बाद विप्लव बाजोरिया ने अपनी याचिका वापस ले ली।

अंकिता पटेल

Amravati Election Case Viplav Bajoria: अमरावती में स्थानीय प्राधिकारी निर्वाचन क्षेत्र से जुड़े मामले में विप्लव बाजोरिया को बड़ा झटका लगा है। उनकी ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। न्यायालय ने कहा कि याचिका में राहत प्रदान करने के लिए पर्याप्त तथ्य नहीं हैं। इसके बाद बाजोरिया ने अपनी याचिका वापस ले ली। इस घटनाक्रम के साथ ही उन्हें तत्काल राहत मिलने की उम्मीदों पर विराम लग गया है।

उच्च न्यायालय के आदेश को दी थी चुनौती

प्राप्त जानकारी के अनुसार, संबंधित मामले को लेकर विप्लव बाजोरिया ने उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती देते हुए सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था। उन्होंने अपने वकील एड। अमरसिंह व्दारा रविवार को ऑनलाइन तरीके से स्पेशल लीव पीटीशन दाखिल की थी। याचिका में न्यायालय से राहत प्रदान करने और पूर्व आदेश पर पुनर्विचार की मांग की गई थी।

हालांकि, सर्वोच्च न्यायालय ने मामले की सुनवाई के बाद याचिका को स्वीकार करने से इंकार कर दिया। सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय के बाद अब संबंधित प्रक्रिया पूर्ववत जारी रहेगी। कानूनी जानकारों का मानना है कि सर्वोच्च न्यायालय के इस फैसले से मामले में एक महत्वपूर्ण मोड़ आया है और इसका प्रभाव आगामी राजनीतिक तथा निर्वाचन गतिविधियों पर भी पड़ सकता है।

वहीं सुप्रीम कोर्ट के अनुसार फैसला यूं रहा कि विशेष अनुमति याचिका याचिकाकर्ता द्वारा वापस लिए जाने के कारण खारिज कर दी गई। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति पी. के. मिश्रा की पीठ के समक्ष हुई। बाजोरिया की याचिका का विरोध करते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता श्रेयस उदय ललित ने पैरवी की। वहीं चंद्रशेखर डोरले और संदीप गुप्ता ने भी उम्मीदवार प्रवीण पोटे की ओर से पक्ष रखा।

राजनीतिक हलकों में बढ़ी चर्चा

निर्णय सामने आने के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। विभिन्न दलों के नेताओं और कार्यकर्ताओं की नजर अब मामले के अगले घटनाक्रम पर टिकी हुई है। वहीं, बाजोरिया समर्थकों में निराशा का माहौल देखा जा रहा है। फिलहाल, सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बाद विप्लव बाजोरिया के सामने उपलब्ध कानूनी विकल्पों पर मंथन शुरू हो गया है। मामले को लेकर संबंधित पक्षों की ओर से विस्तृत प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा की जा रही है।

एसएलपी में तकनीकी अड़चन

पूर्व विधायक विप्लव बाजोरिया ने विधान परिषद चुनाव के लिए नामांकन रद्द किए जाने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में स्पेशल लीव पीटीशन (एसएलपी) दायर की थी। यह याचिका 7 जून की शाम ऑनलाइन दाखिल की गई, लेकिन तकनीकी त्रुटि के कारण फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में पंजीकृत नहीं हो सकी है।

विधि सूत्रों के अनुसार सुप्रीम कोर्ट ने याचिका में मौजूद त्रुटियों की जानकारी देते हुए उन्हें दूर करने को कहा है। त्रुटि सुधार के बाद ही याचिका को सुनवाई के लिए स्वीकार करने पर निर्णय लिया गया। ऐसा भी माना जा रहा यदि याचिका स्वीकार होती है तो जिला निर्वाचन अधिकारी सहित अन्य संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किए जा सकते है। लेकिन अब बाजोरिया व्दारा याचिका वापस लेने से सभी तरह की चर्चाएं थम गई है।

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