अमरावती MLC चुनाव: नागपुर हाईकोर्ट का बाजोरिया को झटका, नामांकन रद्द रखने का फैसला बरकरार

Viplav Bajoria : अमरावती विधान परिषद चुनाव से जुड़े विवाद में नागपुर हाईकोर्ट ने पूर्व विधायक विप्लव बाजोरिया की इंटरिम प्रेयर खारिज कर दी है। कोर्ट ने नामांकन रद्द करने के फैसले को सही ठहराया।
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Nagpur High Court (सोर्सः फाइल फोटो- सोशल मीडिया)
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Amravati MLC Election: विधान परिषद के लिए होने वाले चुनाव को लेकर जारी विवाद नागपुर उच्च न्यायालय पहुंचा, लेकिन वहां पर भी पूर्व विधायक विप्लव बाजोरिया द्वारा दायर की गई इंटरिम प्रेयर को उच्च न्यायालय ने खारिज कर दिया। सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद न्यायाधीश प्रफुल्ल कुंभलकर ने अमरावती जिला निर्वाचन अधिकारी द्वारा दिए गए निर्णय को सही बताया।

सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी बाजोरिया ने न्यायमूर्ति से अनुरोध करते हुए फिलहाल चुनाव लड़ने के लिए अपील की थी। उनका कहना था कि इसके पश्चात न्यायालय का जो भी निर्णय आएगा, वह उन्हें मान्य रहेगा। सभी दलीलें सुनने के बाद न्यायालय ने अपना उक्त निर्णय कायम रखा। फैसले के बाद अब बाजोरिया पितापुत्र के दिल्ली स्थित सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल करने के लिए रवाना होने की जानकारी है।

नामांकन पर दर्ज कराई गई थीं आपत्तियां

विशेष स्थानीय स्वराज्य प्राधिकरण चुनाव नामांकन की जांच के दौरान भाजपा प्रत्याशी प्रवीण पोटे, कांग्रेस उम्मीदवार हर्षदीप देशमुख तथा निर्दलीय प्रशांत महल्ले द्वारा बाजोरिया के नामांकन पर आपत्ति दर्ज करवाई गई थी। दिनभर चली सभी पक्षों की दलीलों के बाद रात करीब 8 बजे निर्वाचन अधिकारी ने विप्लव बाजोरिया का नामांकन रद्द करने का निर्णय लिया था।

पितापुत्र के खिलाफ मामला दर्ज

इसके पश्चात प्रशासन और बाजोरिया के बीच निर्णय के कागजात को लेकर विवाद भी हुआ था। इससे प्रशासन ने शासकीय कामों में दखलअंदाजी को लेकर विप्लव बाजोरिया व उनके पिता गोपीकिशन बाजोरिया के खिलाफ गाडगे नगर थाने में शिकायत दर्ज करवाई थी। इससे चुनाव में काफी सरगर्मी बढ़ गई है।

निर्वाचन अधिकारी का फैसला बरकरार

नामांकन रद्द होने के पश्चात बाजोरिया द्वारा निर्वाचन अधिकारी के निर्णय के खिलाफ नागपुर उच्च न्यायालय में चुनाव लड़ने के लिए इंटरिम प्रेयर दाखिल की गई थी। इस बीच अन्य तीन उम्मीदवारों ने भी कैविएट दाखिल किया था। सभी पक्षों की सुनवाई के पश्चात बाजोरिया द्वारा दायर याचिका को नागपुर उच्च न्यायालय ने खारिज कर दिया। शहर में सुबह से ही इस बात को लेकर काफी उत्सुकता थी। न्यायालय द्वारा बाजोरिया की याचिका खारिज करते ही सोशल मीडिया पर यह बात आग की तरह फैल गई। इसको लेकर अब चुनाव में क्या स्थिति रह सकती है, इस पर शहर में तरहतरह की चर्चाएं व्याप्त हैं।

नागपुर उच्च न्यायालय में बाजोरिया की ओर से एड. रेणुका शिरपुरकर ने युक्तिवाद किया। वहीं प्रवीण पोटे की ओर से एड। सुनील मनोहर ने पैरवी की। उनके साथ एड. प्रशांत देशपांडे, एड. चंद्रकांत डोरले, एड. संदीप गुप्ता, एड. रोहित उपाध्याय एवं एड. सुमित शर्मा ने सहयोग किया। कांग्रेस प्रत्याशी हर्षदीप देशमुख की ओर से एड. भांगड़े तथा निर्दलीय प्रत्याशी प्रशांत महल्ले की ओर से एड. ऋषिकेश मार्डीकर ने पक्ष रखा।

क्या है इंटरिम प्रेयर

इंटरिम प्रेयर का कानूनी अर्थ अंतरिम राहत के लिए की गई अस्थायी अपील है। जब किसी कोर्ट केस में अंतिम फैसला आने में लंबा समय लगता है, तो कोई व्यक्ति तात्कालिक नुकसान से बचने के लिए जज से जो अस्थायी प्रार्थना या मांग करता है, उसे इंटरिम प्रेयर कहते हैं। यह मुख्य केस जीतने या हारने से जुड़ी नहीं होती, बल्कि सुनवाई के दौरान स्थिति को सुरक्षित रखने के लिए होती है।

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