अकोला में बोगस बीज संकट स्तिथि पर प्रकाश तायडे (सोर्स- सोशल मीडिया)  
अकोला

अकोला में खरीफ फसलों पर गहराया संकट; एक महीने की देरी से आया मानसून, 60% से भी कम हुई बुआई

Akola Kharif Crop: अकोला जिले में मानसून में देरी और बोगस बीजों के चलते खरीफ फसलों की स्थिति चिंताजनक है। अब तक 60% से भी कम बुआई हो सकी है और किसानों पर दोबारा बुआई का संकट मंडरा रहा है।

केतकी मोडक

Akola Kharif Crop Failure News: इस वर्ष अकोला जिले में मानसून की बारिश काफी देरी से आने के कारण फिलहाल खरीफ फसलों की स्थिति बहुत अच्छी नहीं कही जा सकती है। पूरे मृग नक्षत्र में जिले में बिल्कुल बारिश नहीं हुई, देखा जाए तो बारिश में करीब 1 माह की देरी हुई है। उसके बाद भी कुछ थोड़ी-बहुत बारिश में जिले के किसानों ने खरीफ फसलों की बुआई की। उस पर मूंग, उड़द की बुआई का तो समय ही निकल गया, उसकी जगह कुछ किसानों ने कपास की फसल का क्षेत्र बढ़ा दिया है।

जिले के किसानों का कहना है कि, जिन-जिन क्षेत्रों में बुआई हुई है उन क्षेत्रों में अब बारिश में विलंब होने के कारण फसलों की बढ़त रुक गई है। किसानों का ध्यान इस समय लगातार आसमान की ओर लगा हुआ है। यदि जल्दी ही दमदार बारिश नहीं होती है तो जिले के किसानों पर दोबारा बुआई का संकट आ सकता है।

कुछ किसानों का कहना है कि, बारिश में देरी होने के कारण उन्होंने बिना समुचित बारिश हुए ही अपने खेतों में खरीफ फसलों की बुआई कर दी है। अब उन्हें दमदार बारिश का इंतजार है। इसी तरह कुछ क्षेत्रों में बोगस बीज के कारण भी फसलें अंकुरित नहीं हुई हैं, जिसमें सर्वाधिक शिकायतें सोयाबीन बीज की हैं।

बोगस बीज से किसान संकट में

अकोला जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष प्रकाश तायडे ने कहा है कि जिले में कई क्षेत्रों में बोगस बीज के कारण किसानों की फसलें अंकुरित नहीं हुई हैं। इसी तरह बारिश के अभाव में भी फसलों की स्थिति बिगड़ रही है। कुल मिलाकर जिले का किसान संकट में है, सरकार का काम है कि, बोगस बीज बेचने वाले कृषि सामग्री विक्रेताओं पर सख्त कार्रवाई करे।

अभी तक बुआई 60% के भीतर

अकोला जिला में अभी भी बुआई 60 प्रश. पर भी नहीं पहुंची है। जानकारी के अनुसार, जिले में 4 लाख 32 हजार हेक्टेयर के करीब खरीफ फसलों का क्षेत्र है, जिसमें से अब तक 2 लाख 48 हजार 400 हेक्टेयर क्षेत्र के करीब खरीफ फसलों की बुआई होने की जानकारी मिली है। देखा जाए तो यह बुआई 60 प्रश. के भीतर ही है।

1,18,770 हेक्टेयर में सोयाबीन तथा करीब 95 हजार हेक्टेयर में मुख्य रूप से कपास की फसल की बुआई की गई है। इसी तरह 34 हजार 174.77 हेक्टेयर क्षेत्र में तुअर तथा अन्य क्षेत्रों में मूंग, उड़द, ज्वार की बुआई की गई है।

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