जलापूर्ति संकट (सोर्स - सोशल मिडिया)  
अकोला

ट्रांसफॉर्मर खराब होने से गहराया जलसंकट, अकोला में बैकअप व्यवस्था की मांग

Akola Water Crisis: अकोला के प्रमुख जलशुद्धिकरण केंद्र के ट्रांसफॉर्मर खराब होने से चार दिन से पानी बंद, टैंकर व्यवस्था नाकाफी। वंचित बहुजन आघाड़ी ने स्थायी बैक‑अप व सार्वजनिक सूचना की मांग की।

केतकी मोडक

Akola Water Supply Crisis:  अकोला शहर के प्रमुख जलशुद्धीकरण केंद्र में ट्रांसफॉर्मर खराब होने के कारण पिछले चार दिनों से पूरे शहर की जलापूर्ति पूरी तरह ठप है। इसके चलते नागरिकों को भीषण जलसंकट का सामना करना पड़ रहा है। इस गंभीर समस्या को लेकर वंचित बहुजन आघाड़ी (वीबीए) के गुट नेता नीलेश देव ने प्रशासन से तत्काल प्रभावी उपाय करने तथा भविष्य में ऐसी आकस्मिक स्थिति से बचने के लिए जलशुद्धीकरण केंद्र पर स्थायी 'स्टैंडबाय' (वैकल्पिक) व्यवस्था स्थापित करने की मांग की है। उन्होंने प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि इस समस्या का जल्द ही स्थायी समाधान नहीं किया गया, तो नागरिकों के तीव्र आक्रोश को देखते हुए लोकतांत्रिक तरीके से उग्र जनआंदोलन किया जाएगा।

शहर में लगातार चार दिनों से पानी की आपूर्ति पूरी तरह बंद रहने से पहले से ही लचर चल रही जल वितरण प्रणाली पूरी तरह चरमरा गई है। शहर के कई रिहायशी इलाकों में पिछले छह दिनों से, कुछ स्थानों पर आठ दिनों से, तो कई बस्तियों में पिछले दस दिनों से पानी की एक बूंद नहीं पहुँची है। इस विकट स्थिति के कारण महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों सहित आम परिवारों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है और उनका दैनिक जीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है।

टैंकर व्यवस्था भी साबित हो रही नाकाफी

नीलेश देव ने प्रशासनिक दावों पर सवाल उठाते हुए कहा कि महानगरपालिका (मनपा) की ओर से टैंकरों के माध्यम से जलापूर्ति करने का दावा तो किया जा रहा है, लेकिन शहर के अधिकांश हाइड्रेंट (पानी भरने के मुख्य स्रोत) बंद होने के कारण यह व्यवस्था पूरी तरह निष्प्रभावी साबित हो रही है। वर्तमान में केवल एक निजी हाइड्रेंट ही चालू है, जिसके भरोसे पूरे शहर में पानी की सुचारु आपूर्ति करना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है।

उन्होंने इसे प्रशासन की नियोजन संबंधी गंभीर चूक बताते हुए कहा कि इतने बड़े अकोला शहर की जलापूर्ति व्यवस्था को केवल एक ट्रांसफॉर्मर पर निर्भर रखना बेहद गैर-जिम्मेदाराना है। उन्होंने प्रमुखता से मांग की कि महान जलशुद्धीकरण केंद्र में एक स्थायी स्टैंडबाय ट्रांसफॉर्मर, वैकल्पिक विद्युत लाइन, मजबूत बैकअप सिस्टम तथा आपातकालीन संचालन तंत्र तत्काल स्थापित किया जाए, ताकि भविष्य में किसी भी तकनीकी खराबी के कारण शहरवासियों को ऐसे संकट का सामना न करना पड़े।

नागरिकों को समय पर मिले तकनीकी खराबी की सूचना

उन्होंने मनपा के डिजिटल तंत्र पर भी सवाल उठाया कि जब संपत्ति कर विभाग के माध्यम से शहर के सभी नागरिकों का मोबाइल डेटा प्रशासन के पास उपलब्ध है, तो जलापूर्ति बाधित होने, मरम्मत कार्य की संभावित अवधि, वैकल्पिक जलापूर्ति के स्रोतों और संशोधित समय-सारिणी (टाइम-टेबल) की जानकारी एसएमएस (SMS) के माध्यम से नागरिकों तक क्यों नहीं पहुंचाई जाती? प्रशासन नागरिकों को अंधेरे में रखकर अपनी जवाबदेही से बच नहीं सकता।

उन्होंने मांग की कि जल विभाग के वार्षिक रखरखाव (मेंटेनेंस) कार्यों का एक वैज्ञानिक और समयबद्ध नियोजन किया जाए। एक्सप्रेस फीडर की सुविधा उपलब्ध होने के बावजूद जलशुद्धीकरण केंद्र की बिजली बार-बार गुल होना एक गंभीर विषय है। इस संबंध में मनपा, महावितरण और संबंधित तकनीकी विभागों की एक संयुक्त उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक तत्काल बुलाई जानी चाहिए और इस समस्या का स्थायी तकनीकी समाधान सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

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