अकोला में सोयाबीन फसल  (सोर्सः सोशल मीडिया)
अकोला

Akola News: अकोला के किसानों पर दोहरी मार, बारिश की कमी के बीच सोयाबीन में रोग का प्रकोप

Soybean Production Loss: अकोला के कई गांवों में सोयाबीन की फसल में पत्तियां पीली पड़ने, फूल झड़ने और यलो मोजैक जैसे लक्षण दिख रहे हैं। किसानों ने तत्काल सर्वेक्षण और फसल उपचार की मांग की।

आंचल लोखंडे

Soybean Crop Disease In Akola: बेमौसम बारिश, बारिश की लंबी खामोशी, बढ़ती महंगाई और फसलों के लिए उचित बाजार का अभाव जैसे संकटों से पहले ही जूझ रहे किसानों की चिंता अब सोयाबीन की फसल पर मंडरा रहे रोग के प्रकोप से और बढ़ गई है। जिले के किसानों को दोहरे संकट का सामना करना पड़ रहा है। जिले के कुछ हिस्सों में पर्याप्त बारिश का इंतजार कर रहे किसानों के सामने अब सोयाबीन की फसल में पत्तियां पीली पड़ने और फूल झड़ने की समस्या खड़ी हो गई है। कई खेतों में यलो मोजैक जैसे रोग के लक्षण दिखाई देने से किसानों में डर का माहौल है।

...तो घट सकता उत्पादन यदि समय रहते रोग की रोकथाम नहीं हुई तो उत्पादन में बड़ी गिरावट की आशंका जताई जा रही है। पिछले कुछ दिनों से बारिश ने विश्राम लिया है। इसका सीधा असर खरीफ फसलों पर दिखाई देने लगा है। इस समय सोयाबीन की फसल फूल आने की अवस्था में है, लेकिन बारिश न होने के कारण खेतों में आवश्यक नमी कम हो रही है। दूसरी ओर सोयाबीन की पत्तियां पीली पड़ रही हैं और कलियां व फूल झड़ने लगे हैं। इससे फसल की उत्पादकता प्रभावित होने की आशंका है।

अकोला में किसानों ने मांगा तत्काल सर्वे

कई गांवों में फसलों पर पाए जा रहे रोग के लक्षण अकोला तहसील के बोरगांव मंजू, वाशिंबा, पलसो बढे, काटेपूर्णा, कानशिवनी, सांगलूद, दहिगांव, वणी रंभापुर सहित कई गांवों में सोयाबीन के साथ अन्य खरीफ फसलों पर भी रोग और कीट प्रकोप के लक्षण दिखाई देने की जानकारी किसानों ने दी है। कुछ दिन पहले हुई बारिश से फसलों को राहत मिली थी। किसानों को उम्मीद थी कि बारिश लगातार होने से खेतों में पर्याप्त नमी बनी रहेगी और फसल अच्छी तरह विकसित होगी। लेकिन इसके बाद बारिश ने लंबा ब्रेक ले लिया। खेतों में नमी कम होने के साथ ही फसल पर रोग का संकट बढ़ गया है।

फूल झड़ने से उत्पादन पर पड़ रहा सीधा असर

सोयाबीन इस समय फूल आने की महत्वपूर्ण अवस्था में है। इसी दौरान रोग की चपेट में आने से कलियां और फूल झड़ रहे हैं। किसानों के अनुसार, फूलों के झड़ने का सीधा असर फलियों की संख्या और अंतिम उत्पादन पर पड़ सकता है। यदि यही स्थिति बनी रही तो सोयाबीन के उत्पादन में उल्लेखनीय कमी हो सकती है। इस वर्ष किसानों ने सोयाबीन के साथ तुअर, कपास, मूंग और उड़द जैसी खरीफ फसलों की भी बुवाई की है।

ग्रामीणों ने की तत्काल सर्वेक्षण की मांग

किसानों ने कृषि विभाग से प्रभावित क्षेत्रों में तत्काल खेतों का सर्वेक्षण करने की मांग की है। रोग का वास्तविक कारण क्या है, इसका पता लगाकर किसानों को वैज्ञानिक तरीके से उपचार और फसल प्रबंधन की जानकारी देने की आवश्यकता है। साथ ही प्रभावित फसलों का पंचनामा कर आवश्यक सहायता उपलब्ध करान की मांग भी किसानों ने की है।

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