

नागपुर. हिंगना के तिहरे हत्या प्रकरण में हाल ही में जिला सत्र न्यायालय के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश पी.वाई. लाडेकर ने गुमगांव निवासी राजू बिरहा को मृत्युदंड की सजा सुनाई. जिस पर मुहर के लिए हिंगना पुलिस के माध्यम से राज्य सरकार अब हाई कोर्ट पहुंची. साथ ही आरोपी की ओर से सत्र न्यायालय के आदेश को चुनौती देते हुए अपील दायर की गई. दोनों याचिकाओं पर एकसाथ चल रही सुनवाई के बाद न्यायाधीश विनय जोशी और न्यायाधीश वाल्मीकि मेनेजेस ने तिहरे हत्या के लिए आरोपी राजू बिरहा को 30 वर्ष की जेल की सजा सुनाई. उल्लेखनीय है कि हाल ही में अदालत ने आरोपी का जेल में कैसा बर्ताव है. इस संदर्भ में रिपोर्ट पेश करने के आदेश जेल अधीक्षक को दिए थे. राज्य सरकार की ओर से सहायक सरकारी वकील संजय डोईफोड़े ने पैरवी की.
सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि फांसी की सजा का आरोपी 17 नवंबर 2015 से जेल में सड़ रहा है. इसे देखते हुए अदालत का मानना था कि आरोपी के बर्ताव के साथ ही यदि उसे काम सौंपा गया हो तो किस गतिविधियों में आरोपी जुटा हुआ है और किसी भी गैर बर्ताव के लिए क्या उसे सजा दी गई है?. इसकी भी जानकारी देने के आदेश जेल अधीक्षक को दिए थे. उल्लेखनीय है कि राजू बिरहा और सुनील काटोंगले के बीच पान की टपरी की जगह को लेकर विवाद चल रहा था. 17 नवंबर 2015 को सुनील अपने मित्र आशीष उर्फ गोलू गायकवाड़ और कैलाश बहादुरे खड़े होकर आपस में बात कर रहे थे. इसी दौरान बिरहा अपने साथी कमलेश के साथ वहां पहुंच गया. तुरंत सत्तूर निकालकर सुनील पर हमला कर दिया. जिससे सुनील की घटनास्थल पर ही मृत्यु हो गई. अचानक हुए हमले से घबराकर आशीष और कैलाश वहां से भागने लगे. दोनों को भागते देख बिरहा ने बाइक से उनका पीछा किया. थोड़ी ही दूरी पर उन्हें पकड़कर दोनों की हत्या कर दी.
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से पैरवी कर रहे अधि. संजय डोईफोड़े ने कहा कि आरोपी का यह जघन्य अपराध है. आरोपी ने जिसके साथ विवाद चल रहा था न केवल उसे मौत के घाट उतार दिया, बल्कि इस घटना का कोई चश्मदीद गवाह तक न बचे, इसके लिए अन्य 2 को भी मौत की नींद सुला दिया. इस क्रुरता के लिए आरोपी को दी गई फांसी की सजा पर मुहर लगाने का अनुरोध अदालत से किया गया. निचली अदालत ने भी फांसी की सजा सुनाते हुए कहा था कि मामले में आरोपी ने आपराधिक और क्रूर मानसिकता का परिचय दिया है. न केवल एक व्यक्ति को मौत के घाट उतार दिया, बल्कि चश्मदीद गवाह के रूप में कोई न बच पाए, इसके लिए अन्य 2 लोगों की भी हत्या कर दी. अब हाई कोर्ट ने फांसी को बदलकर 30 वर्ष की जेल की सजा सुनाई है.