Akola Medical College: स्थानीय सरकारी चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल में एक गरीब महिला द्वारा अपने रिश्तेदार को उपचार के लिए पीठ पर उठाकर अस्पताल के भीतर ले जाने की घटना को लेकर कांग्रेस जिलाध्यक्ष प्रकाश तायडे ने भाजपा सरकार और स्थानीय जनप्रतिनिधियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि अस्पताल में स्ट्रेचर उपलब्ध न होना और कर्मचारियों द्वारा सहायता नहीं किए जाने की घटना स्वास्थ्य प्रशासन की बदहाल व्यवस्था को उजागर करती है। प्रकाश तायडे ने जारी बयान में कहा कि केंद्र से लेकर राज्य तथा स्थानीय स्तर तक सत्ता में रहने के बावजूद भाजपा सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने में विफल रही है।
उन्होंने कहा कि मेडिकल कॉलेज की स्थापना वर्ष 2002 में हुई थी, लेकिन आज भी यहां कर्मचारियों की संख्या जिला अस्पताल के समान ही है। मेडिकल कॉलेज अस्पताल के लिए आवश्यक अतिरिक्त अधिकारी, कर्मचारी और डॉक्टरों की मंजूरी मिलने के बावजूद नियुक्तियों की प्रक्रिया वर्षों से प्रलंबित पड़ी हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री, पालक मंत्री, सांसद और विधायक सभी भाजपा से होने के बावजूद अस्पताल की मूलभूत समस्याओं का समाधान नहीं हो सका है। यही कारण है कि मरीजों और उनके परिजनों को आए दिन परेशानियों का सामना करना पड़ता है। हाल ही में हुई घटना से शहर की छवि पूरे राज्य में प्रभावित हुई है।
प्रकाश तायडे ने कहा कि मेडिकल कॉलेज में तीन समाजसेवकों के पद स्वीकृत हैं, लेकिन संबंधित कर्मचारी अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन नहीं कर रहे हैं। उनका कार्य ओपीडी में मरीजों और उनके परिजनों को मार्गदर्शन एवं सहायता प्रदान करना है, किंतु ऐसा नहीं किया जा रहा। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ समाजसेवक मरीजों की सहायता करने के बजाय अधिकारियों के कक्षों में समय व्यतीत करते हैं, जिसके कारण जरूरतमंद लोगों को परेशानी झेलनी पड़ती है।
कांग्रेस जिलाध्यक्ष तायड़े ने मेडिकल कॉलेज के डीन डा।सोनवणे से मामले की जांच कर संबंधित समाजसेवकों के कार्यों का मूल्यांकन करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि समाजसेवकों की कार्यप्रणाली की विस्तृत जांच कर रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए तथा लापरवाही सिद्ध होने पर उनके विरुद्ध कानूनी कार्रवाई और सेवा से बर्खास्तगी की प्रक्रिया शुरू की जाए। प्रकाश तायडे ने कहा कि मरीजों को सम्मानजनक और समय पर उपचार उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है तथा ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाने चाहिए।