अकोला: मोर्णा नदी को प्रदूषणमुक्त बनाने की 67 करोड़ की योजना अधर में, तीन साल बाद भी नहीं शुरू हुआ शोधन कार्य

Morna River Pollution Control: अकोला में 67 करोड़ रुपयो की मोर्णा नदी सीवरेज योजना 3 साल बाद भी अधूरी है। जालियां चोरी होने से पाइपलाइन कचरे और गाद से पूरी तरह जाम हो चुकी है।
Morna River Pollution Control
मोर्णा नदी फाइल फोटो (सोर्स - सोशल मीडिया)
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Akola Sewerage Project Delay: अकोला शहर की मोर्णा नदी को प्रदूषण मुक्त बनाने के उद्देश्य से अमृत योजना के प्रथम चरण के तहत 67 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित भूमिगत सीवरेज योजना तीन वर्ष बीत जाने के बाद भी पूरी तरह कार्यान्वित नहीं हो सकी है। अब योजना के रखरखाव और मरम्मत का कार्य शुरू किया गया है, लेकिन जाम पाइपलाइन और तकनीकी समस्याओं के कारण यह महानगरपालिका प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गई है। योजना के अंतर्गत शिलोडा में 30 एमएलडी तथा पीकेवी परिसर में 7 एमएलडी क्षमता के सीवेज शोधन संयंत्र स्थापित किए गए हैं।

इसके लिए मोर्णा नदी के बाएं किनारे पर 2.38 कि.मी. तथा दाएं किनारे पर 11.68 कि.मी. लंबी मुख्य मलजल वाहिनी बिछाई गई है। मोर्णा नदी में मिलने वाले 38 नालों का गंदा पानी इन पाइपलाइनों के माध्यम से शिलोडा स्थित शोधन केंद्र तक पहुंचाकर उसे साफ किया जाना था। हालांकि विभिन्न तकनीकी कारणों से पिछले तीन वर्षों से नालों के पानी का शोधन कार्य शुरू नहीं हो सका है।

अकोला मनपा ने रखरखाव के लिए तीन बार निविदाएं जारी कीं, लेकिन कोई प्रतिसाद नहीं मिला। चौथी बार जारी निविदा के तहत ठाणे की एक कंपनी को अगले तीन वर्षों के लिए 6 करोड़ 75 लाख रुपये की लागत से रखरखाव और मरम्मत का कार्य सौंपा गया है। कंपनी ने काम शुरू कर दिया है, लेकिन पाइपलाइनों में भारी मात्रा में जमा गाद और कचरा बड़ी बाधा बन गया है।

जालियों की चोरी से बढ़ी परेशानी

योजना की सबसे बड़ी समस्या 38 नालों पर लगाई गई लोहे की जालियों की चोरी है। इन जालियों का उद्देश्य नालों से आने वाले कचरे को रोकना था, लेकिन चोरी होने के कारण कचरा सीधे पाइप लाइन में पहुंच गया और पूरी प्रणाली जाम हो गई। उच्च दबाव से पानी छोड़ने के बावजूद गाद नहीं निकल रही है, जिसके चलते अब भूमिगत पाइप लाइन खोदकर साफ करनी पड़ रही है।

मरम्मत में बढ़ेगा अतिरिक्त खर्च

  • पाइप लाइन की खुदाई और सफाई के दौरान कई स्थानों पर पाइप टूट रहे हैं, जिससे मरम्मत का खर्च भी बढ़ रहा है।
  • गाद निकालने और नई जालियां लगाने पर मनपा को मूल अनुबंध से अलग अतिरिक्त खर्च करना पड़ेगा।
  • अधिकारियों का मानना है कि यदि दोबारा जालियां चोरी हुईं, तो करोड़ों रुपये की यह योजना स्थायी रूप से निष्प्रभावी साबित हो सकती है।
  • इससे मोर्णा नदी को प्रदूषण मुक्त बनाने का उद्देश्य भी अधूरा रह जाने की आशंका व्यक्त की जा रही है।
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