प्रतीकात्मक तस्वीर ( सोर्स: सोशल मीडिया ) 
अकोला

अकोला मनपा: बाजार वसूली ठेके में उलझा प्रशासन, 2 करोड़ से 1.5 करोड़ की राशि पर भी नहीं मिल रहे ठेकेदार

Akola News: अकोला मनपा की बाजार वसूली ठप। 2 करोड़ की निविदा राशि घटाकर 1.5 करोड़ की गई, फिर भी ठेकेदार नहीं आए सामने। केवल 6 कर्मचारियों के भरोसे वसूली से मनपा को भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है।

रूपम सिंह

Akola Market struggles News: बाजार वसूली की राशि दो करोड़ से घटाकर डेढ़ करोड़ कर दी गई। इसके बाद पुनः निविदाएं जारी की गईं। लेकिन इन निविदाओं को भी कोई प्रतिसाद नहीं मिला, जिसके चलते प्रशासन ने एक बार फिर निविदाएं प्रकाशित की हैं। अब यदि इस बार भी ठेकेदार आगे नहीं आते हैं तो यह स्पष्ट होगा कि राशि और कम की जाएगी या फिर से निविदाएं जारी होंगी।

शहर में सड़क किनारे तथा मनपा द्वारा निर्धारित स्थानों पर हाथगाड़ी या नीचे बैठकर व्यवसाय करने वालों से प्रतिदिन शुल्क लिया जाता है। मनपा ने दैनिक बाजार वसूली का काम ठेका पद्धति से दिया था। लेकिन 31 दिसंबर को स्वाती कंपनी का ठेका रद्द कर दिया गया। तब से बाजार वसूली का काम मनपा के कर्मचारी कर रहे हैं।

कर्मचारियों की कमी

मनपा का क्षेत्रफल 124 वर्ग किमी है, लेकिन बाजार वसूली के लिए केवल 6 कर्मचारी नियुक्त हैं। इस कारण वसूली से बहुत कम राशि प्राप्त हो रही है। वर्तमान में बाजार शुल्क 10 से 15 रुपये है। प्रशासन ने इसमें वृद्धि करने का निर्णय लिया। इसके लिए समिति गठित की गई, जिसने शुल्क को दोगुना करने का निर्णय लिया।

हालांकि आठ महीने बीत जाने के बाद भी बाजार वसूली की निविदाओं पर निर्णय नहीं लिया गया, जिससे मनपा को आर्थिक नुकसान हो रहा था। बाद में प्रशासन ने निविदाएं जारी कीं। दैनिक बाजार शुल्क बढ़ने से निविदा राशि भी बढ़ाई गई।

लेकिन दो करोड़ की राशि देखकर ठेकेदार पीछे हट गए। तीसरी बार निविदा प्रकाशित करने पर भी एक भी निविदा दाखिल नहीं हुई। इसके चलते निविदा की राशि घटाकर डेढ़ करोड़ कर दी गई और पुनः निविदाएं जारी की गई। लेकिन इन निविदाओं को भी कोई प्रतिसाद नहीं मिला, जिसके चलते मनपा ने फिर से निविदाएं प्रकाशित की हैं।

क्या फिर घटेगी राशि

पहले बाजार वसूली का ठेका 96 लाख रु। में गया था। उस समय ठेकेदार चाहे जितनी वसूली करता, मनपा को सालाना 96 लाख रुपये का राजस्व मिलता था। प्रशासन ने बाद में यह राशि 2 करोड़ कर दी। प्रतिसाद न मिलने पर इसे घटाकर डेढ़ करोड़ किया गया। अब डेढ़ करोड़ रु। की राशि पर भी कोई ठेकेदार सामने नहीं आया। ऐसे में अब फिर से राशि घटाई जाएगी या नहीं, यह आने वाले कुछ दिनों में स्पष्ट होगा।

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