Nagda Third Fourth Railway Line Survey: तीसरी और चौथी रेल लाइन के प्रस्तावित सर्वे को लेकर नागदा क्षेत्र में किसानों, ईंट भट्ठा संचालकों और स्थानीय व्यापारियों की चिंता सामने आई है। रेलवे द्वारा किए जा रहे नए सर्वे के मार्ग को लेकर प्रभावित लोगों ने प्रशासन से दोबारा समीक्षा की मांग की है। नागदा जनहित समिति ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर कम से कम नुकसान वाले वैकल्पिक मार्ग का चयन करने की मांग की है।
रेलवे की सर्वे टीम ने नवीन कृषि उपज मंडी के पास से रतन्याखेड़ी रोड, बेरछा रोड, जूना नागदा और गिंदवानिया होते हुए स्टेट हाईवे-17 तक सर्वे के निशान लगाए हैं। प्रस्तावित मार्ग को लेकर क्षेत्र के किसानों और कारोबारियों में जमीन प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है। समिति का कहना है कि रेल परियोजना क्षेत्र के विकास के लिए जरूरी है, लेकिन सर्वे मार्ग तय करते समय स्थानीय लोगों के हितों का भी ध्यान रखा जाना चाहिए।
जनहित समिति के अनुसार नए सर्वे मार्ग में 50 से अधिक ईंट भट्ठे आ सकते हैं। इन ईंट भट्ठों से बड़ी संख्या में श्रमिकों का रोजगार जुड़ा हुआ है। यदि भट्ठे प्रभावित होते हैं तो इससे केवल संचालकों की संपत्ति ही नहीं, बल्कि श्रमिकों की आजीविका पर भी असर पड़ने की आशंका है। इसके अलावा छोटे और सीमांत किसानों की जमीन प्रभावित होने की चिंता भी जताई गई है।
प्रस्तावित रेल लाइन के मार्ग को लेकर नवीन कृषि उपज मंडी की आवाजाही और आसपास के व्यापारिक क्षेत्रों पर भी असर पड़ने की आशंका जताई गई है। स्थानीय व्यापारियों ने बताया कि क्षेत्र में कई लोगों ने जमीन खरीदकर कारोबार से जुड़ी गतिविधियां विकसित की हैं। ऐसे में सर्वे मार्ग के कारण स्थानीय अर्थव्यवस्था प्रभावित होने की चिंता है। प्रभावित किसानों, ईंट भट्ठा संचालकों, श्रमिकों और क्षेत्रवासियों ने प्रशासन से परियोजना का ऐसा मार्ग तय करने की मांग की है, जिससे विकास के साथ नुकसान भी कम हो।
मामले को लेकर सांसद अनिल फिरोजिया ने कहा कि रेलवे की ओर से अभी शुरुआती सर्वे किया गया है। उनके अनुसार किसी परियोजना के लिए तीन स्तर पर सर्वे की प्रक्रिया होती है। सांसद ने भरोसा दिलाया कि विकास किसी के विनाश की कीमत पर नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जहां संभव होगा, सरकारी जमीन के उपयोग को प्राथमिकता देने का प्रयास किया जाएगा, ताकि सरकार पर आर्थिक भार कम हो और किसानों, व्यापारियों एवं स्थानीय लोगों की जमीन का नुकसान भी न्यूनतम रखा जा सके।