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पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह की सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा का तीसरा दिन
गुरुवार सुबह 8 बजे देवास जिले के सिंदूरिया से तराना तक पदयात्रा करेंगे।
यात्रा खजूरिया परमार, जवासिया और कबलीखेड़ा जोड़ होते हुए आगे बढ़ेगी।
दोपहर 1 बजे भोजन और विश्राम, शाम 6 बजे तराना में यात्रा का समापन होगा।
उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर से शुरू हुई यात्रा ओरछा के रामराजा सरकार मंदिर होते हुए अयोध्या पहुंचेगी।
Satya Sanatan Swabhiman Yatra Third day : पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह की सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा गुरुवार को तीसरे दिन में प्रवेश कर गई। उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर से शुरू हुई ये यात्रा देवास जिले के ग्राम सिंदूरिया से तराना तक पहुंचेगी।
करीब 930 किलोमीटर लंबी इस पदयात्रा में दिग्विजय सिंह मंदिरों में पारदर्शिता, धार्मिक संस्थाओं की जवाबदेही और लोकतंत्र में मताधिकार की रक्षा जैसे मुद्दे उठा रहे हैं। यात्रा उज्जैन से ओरछा स्थित रामराजा सरकार मंदिर होते हुए अयोध्या पहुंचेगी।
आयोजकों के अनुसार, गुरुवार सुबह 8 बजे सिंदूरिया से यात्रा शुरू होगी। ये पदयात्रा खजूरिया परमार, जवासिया स्थित गोयल पेट्रोल पंप और कबलीखेड़ा जोड़ स्थित हनुमान मंदिर से होकर गुजरेगी। दोपहर 1 बजे भोजन और विश्राम के बाद शाम 3 बजे यूनीवर्सल एकेडमी स्कूल, तराना से यात्रा फिर शुरू होगी।
कार्यक्रम के मुताबिक पदयात्रा स्वास्तिक मैरिज गार्डन और कलश मैरिज गार्डन होते हुए तराना नगर पहुंचेगी। शाम 6 बजे यात्रा का विश्राम होगा। यात्रियों के रात्रि भोजन और ठहरने की व्यवस्था भी तराना में की गई है। यात्रा में साधु-संतों और समर्थकों के शामिल होने की जानकारी आयोजकों ने दी है।
यात्रा के दूसरे दिन दिग्विजय सिंह ने धार्मिक स्थलों में कथित अनियमितताओं और चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता का मुद्दा उठाया था। उन्होंने चंदा चोरी के आरोपों की जांच कर दोषियों को जेल भेजने की मांग की थी। इसके साथ ही उन्होंने ईवीएम के बजाय बैलेट पेपर से चुनाव कराने की बात भी कही थी।
सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा का प्रमुख उद्देश्य मंदिरों में श्रद्धालुओं के दान और चढ़ावे की व्यवस्था में पारदर्शिता तथा धार्मिक संस्थाओं की जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग उठाना है। इसके साथ लोकतंत्र में मताधिकार की रक्षा का मुद्दा भी यात्रा के केंद्र में है। दिग्विजय सिंह का कहना है कि धार्मिक संस्थाओं में लोगों का विश्वास बनाए रखने के लिए पारदर्शिता और ईमानदारी जरूरी है। उज्जैन से अयोध्या तक की इस पदयात्रा के जरिए वे इन मुद्दों को जनसंवाद के माध्यम से लोगों तक पहुंचा रहे हैं।