Digvijay Singh Satya Sanatan Swabhiman Yatra : मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह की उज्जैन से अयोध्या तक की 'सत्य सनातन स्वाभिमान' यात्रा वर्तमान राजनीतिक और धार्मिक परिदृश्य में बेहद चर्चा का विषय बनी हुई है। नर्मदा परिक्रमा कर चुके दिग्विजय सिंह की यह पद यात्रा क्यों अहम है, इसके पीछे धर्मगुरुओं से लेकर राजनीति के जानकार लोग भी कई मायने निकालने में जुटे हैं।
नवभारत डिजिटल के स्टेट हेड सुधीर दंडोतिया के मुताबिक़ दिग्विजय सिंह यह यात्रा भले ही गैर राजैनतिक हो पर इसका लाभ कांग्रेस को मिलेगा जिस तरह 2017 में दिग्विजय सिंह नर्मदा परिक्रमा का लाभ कांग्रेस को मिला और एमपी में सरकार बनी।
दिग्विजय पहले ही इस यात्रा का रूटमैप जारी कर चुके हैं। दीपावली से पहले 5 नवंबर को प्रथम चरण की पद यात्रा पाटई आश्रम पहुंचेगी। दीपोत्सव के मौके पर पांच दिवसीय अवकाश के बाद फिर यात्रा शुरू करेंगे। खास बात यह है कि दिग्विजय सिंह छोटे-छोटे शहरों में, गांवों में, स्थानीय नागरिकों, धर्मगुरुओं और सामाजिक प्रतिनिधियों से संवाद भी करते चलेंगे।
कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह (Digvijay Singh) की यह यात्रा 2017-18 की नर्मदा परिक्रमा की भी याद दिलाती है। जब दिग्विजय सिंह ने पत्नी के साथ 3300 किलोमीटर लंबी पैदल परिक्रमा की थी। तब नर्मदा परिक्रमा के दौरान दिग्विजय सिंह मध्यप्रदेश के 110 से ज्यादा विधानसभा क्षेत्रों से गुजरे थे। दिग्विजय सिंह की उस पद यात्रा से कांग्रेस के पक्ष में कितना और कैसा माहौल बना यह 2018 के चुनाव नतीजे देखकर आंकलन किया जा सकता है। राजनीति से जुड़े लोग कहते हैं कि 2018 में कांग्रेस 15 वर्षों बाद सत्ता में आ सकी थी। कम वोट से ही, लेकिन कांग्रेस की सरकार कमलनाथ के नेतृत्व में बनी थी।
दिग्विजय सिंह की यह यात्रा उज्जैन से ओरछा होते हुए उत्तर प्रदेश में प्रवेश करेगी, जो मध्यप्रदेश के बुंदेलखंड से उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड से गुजरते हुए अयोध्या तक का सफर करेगी। कांग्रेस नेता की यह यात्रा दोनों ही राज्यों के बुंदेलखंड और सीमावर्ति इलाकों के धार्मिक और सामाजिक समीकरणों को साधने में अहम भूमिका निभा सकती है। कांग्रेस केन-बेतवा के आंदोलन को भी समर्थन दे रही है। यह यात्रा भी कांग्रेस में ऊर्जा दे सकता है।
सवाल 1: दिग्विजय सिंह की इस नई पदयात्रा का नाम क्या है और यह कब से शुरू हुई है?
जवाब: इस पदयात्रा का नाम 'सत्य सनातन स्वाभिमान' यात्रा है, जो 20 अक्टूबर से मध्य प्रदेश के उज्जैन से शुरू हो चुकी है।
जवाब: यह यात्रा उज्जैन से शुरू होकर ओरछा (मध्य प्रदेश) के रास्ते उत्तर प्रदेश में प्रवेश करेगी। यह मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश दोनों राज्यों के बुंदेलखंड व सीमावर्ती इलाकों से गुजरते हुए अयोध्या पहुंचेगी।
जवाब: दीपावली से पहले 5 नवंबर को इस यात्रा का प्रथम चरण पाटई आश्रम पहुंचेगा। इसके बाद दीपोत्सव के मौके पर पांच दिन का अवकाश रहेगा और फिर यात्रा दोबारा शुरू की जाएगी।
जवाब: ट्रस्ट में बदलाव: दिग्विजय सिंह की मांग है कि अयोध्या राम मंदिर के संचालन का जिम्मा मौजूदा 'श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट' से हटाकर पी.वी. नरसिंह राव के समय गठित 'रामालय ट्रस्ट' को दिया जाए, जिसमें शंकराचार्यों और प्रमुख संतों को शामिल किया जाए।
वित्तीय पारदर्शिता: उज्जैन के महाकाल मंदिर, अयोध्या के राम मंदिर और ओरछा के रामराजा मंदिर जैसे बड़े धार्मिक स्थलों के वित्तीय लेन-देन का स्वतंत्र ऑडिट हो और हिसाब जनता के सामने लाया जाए।
मुख्य नारा: इस यात्रा के दौरान "चंदा चोरों, अयोध्या छोड़ो" का नारा गूंज रहा है, जो मंदिरों के चढ़ावे और चंदे में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ है।
जवाब: हां। ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और द्वारका शारदा पीठ के शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती ने इस यात्रा के उद्देश्य और जनजागरण के संकल्प को लेकर अपने आशीर्वचन व शुभकामनाएं दी हैं। इसके अलावा, राम मंदिर आंदोलन से जुड़े रहे पूर्व कारसेवक पंडित संतोष दुबे भी इस अभियान में साथ नजर आ रहे हैं।
जवाब: राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जिस तरह 2017-18 में दिग्विजय सिंह ने अपनी पत्नी के साथ 3300 किमी लंबी 'नर्मदा परिक्रमा' की थी और वे 110 से ज्यादा विधानसभा क्षेत्रों से गुजरे थे, उसका बड़ा फायदा कांग्रेस को 2018 के चुनाव में मिला था और पार्टी करीब 15 साल बाद सत्ता में आई थी। ठीक उसी तर्ज पर इस पदयात्रा को भी कांग्रेस के लिए एक बड़ा जनसंपर्क और जमीन मजबूत करने वाला अभियान माना जा रहा है।