Sunil Lodhi Bundeli Bhajan Viral : जन्म से दृष्टिबाधित, आर्थिक तंगी में पले-बढ़े और कभी स्कूल की दहलीज तक नहीं पहुंच पाने वाले सागर के सुनील लोधी आज अपनी आवाज के दम पर नई पहचान बना रहे हैं। सुनील की आवाज में रिकॉर्ड किया गया फिल्म ‘हनुमान अंश’ का बुंदेली भजन ‘मैंने तुम्हारे भरोसे हनुमान सागर में नैया डाल दई’ सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। संघर्षों से भरी उनकी जिंदगी अब लोगों के लिए प्रेरणा बन रही है।
सुनील लोधी बेहद सामान्य और आर्थिक रूप से कमजोर परिवार से आते हैं। जन्म से दृष्टिबाधित होने के कारण उन्हें जीवन में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। आर्थिक परिस्थितियों के चलते वह कभी स्कूल भी नहीं जा सके। उन्होंने बताया कि जीवन में एक समय ऐसा भी आया, जब लगातार परेशानियों और निराशा के कारण उनके मन में जिंदगी को लेकर नकारात्मक विचार आने लगे थे।
सुनील लोधी के जीवन में उनके दोस्त रोहित की भूमिका बेहद अहम रही। एक बार दोस्तों के साथ नदी किनारे गए सुनील अपने साथियों से बिछड़ गए थे। इस दौरान वह काफी घबरा गए और मानसिक रूप से बेहद परेशान हो गए। ऐसे मुश्किल वक्त में रोहित ने उन्हें संभाला और हर परिस्थिति में साथ देने का भरोसा दिया। यही दोस्ती आगे चलकर सुनील के जीवन का बड़ा सहारा बनी।
इसके बाद सुनील ने बुंदेली भजन गाना शुरू किया। उनकी आवाज और लोकगीतों की शैली को रोहित ने पहचाना। वह सुनील के भजनों की रिकॉर्डिंग करते और उन्हें सोशल मीडिया पर पोस्ट करते थे। धीरे-धीरे सुनील की आवाज लोगों तक पहुंचने लगी और उनकी गायकी को पसंद किया जाने लगा।
बेहतर अवसर की तलाश में सुनील और रोहित मुंबई भी पहुंचे। वहां वर्सोवा बीच पर बनाई गई एक रील फिल्म निर्देशक विशाल चतुर्वेदी तक पहुंची। सुनील की आवाज से प्रभावित होकर निर्देशक ने उन्हें अपने कार्यालय बुलाया और फिल्म में भजन गाने का अवसर दिया। यह मौका सुनील के जीवन में बड़ा मोड़ साबित हुआ।
सुनील ने फिल्म ‘हनुमान अंश’ के लिए बुंदेली भजन रिकॉर्ड किया। शुरुआत में फिल्म को अपेक्षित प्रतिक्रिया नहीं मिली, लेकिन सोशल मीडिया पर सुनील की आवाज वाली रील वायरल होने के बाद लोगों का ध्यान फिल्म की ओर गया। बताया जा रहा है कि रील को एक दिन में करीब 10 लाख व्यूज मिले।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार करीब 2 करोड़ रुपये के बजट में बनी फिल्म ने 30 करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार किया है। हालांकि फिल्म की व्यावसायिक कमाई के आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है। सुनील लोधी की कहानी इस बात की मिसाल है कि कठिन परिस्थितियां प्रतिभा के रास्ते को हमेशा के लिए नहीं रोक सकतीं। सही अवसर और किसी अपने के सहयोग से संघर्ष भी सफलता की नई कहानी लिख सकता है।