Bhagwandas Raikwar Awarded Padma Shri: राष्ट्रपति भवन में आयोजित पद्म सम्मान समारोह में सागर और पूरे बुंदेलखंड के लिए गर्व और भावनाओं से भरा एक विशेष क्षण देखने को मिला। बुंदेली मार्शल आर्ट को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने वाले दाऊ भगवानदास रैकवार को मरणोपरांत पद्मश्री सम्मान से सम्मानित किया गया। हालांकि, यह सम्मान ग्रहण करने के लिए वे स्वयं मौजूद नहीं थे। उनकी जगह उनके बेटे राजकुमार रैकवार ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के हाथों यह प्रतिष्ठित सम्मान प्राप्त किया।
दाऊ भगवानदास रैकवार ने अपना पूरा जीवन बुंदेली मार्शल आर्ट और पारंपरिक अखाड़ा शैली के संरक्षण और प्रचार-प्रसार के लिए समर्पित कर दिया था। बचपन से ही अखाड़े की परंपरा से जुड़े दाऊ ने इस लोक युद्धकला को आधुनिक पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने लाठी, भाला, ढाल, तलवार और त्रिशूल जैसी पारंपरिक कलाओं के माध्यम से बुंदेलखंड की सांस्कृतिक विरासत को देशभर में पहुंचाया। उनके प्रयासों से यह कला नई पीढ़ी तक पहुंची और राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बनी।
दाऊ भगवानदास रैकवार की दशकों लंबी साधना और योगदान को देखते हुए केंद्र सरकार ने उन्हें वर्ष 2026 के पद्मश्री सम्मान के लिए चुना था। 26 जनवरी की पूर्व संध्या पर जब पद्म पुरस्कारों की घोषणा हुई, तब वे बेहद उत्साहित थे। उन्होंने इस सम्मान को अपने जीवनभर की तपस्या और संघर्ष का प्रतिफल बताया था। उनके परिवार और शिष्यों में भी इस उपलब्धि को लेकर खुशी का माहौल था।
सम्मान समारोह से पहले ही नियति ने दुखद मोड़ ले लिया। लंबी बीमारी के चलते 19 अप्रैल 2026 को भोपाल एम्स में दाऊ भगवानदास रैकवार का निधन हो गया। इसके बाद 23 जून को राष्ट्रपति भवन में आयोजित समारोह में उनके बेटे राजकुमार रैकवार ने भारी मन से यह सम्मान ग्रहण किया।
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राजकुमार ने कहा कि यह उनके परिवार के लिए गर्व का क्षण है, लेकिन मन में यह कसक हमेशा रहेगी कि काश उनके पिता स्वयं राष्ट्रपति के हाथों यह सम्मान प्राप्त कर पाते। उन्होंने कहा कि यह सम्मान केवल उनके पिता का नहीं, बल्कि पूरे बुंदेलखंड की संस्कृति, परंपरा और उस मिट्टी का सम्मान है जिसने एक साधारण कलाकार को राष्ट्रीय पहचान दिलाई।