Naigarhi Flood Laborer Swept Away In River: मध्य प्रदेश के मऊगंज जिले के नईगढ़ी में भारी बारिश के बाद हालात बेहद चिंताजनक हो गए हैं। पूरा नगर जलमग्न है और कई वार्डों में घरों के अंदर तक पानी पहुंच गया है। इस बीच अष्टभुजा नदी के पास सामने आए एक वीडियो ने प्रशासनिक आपदा प्रबंधन और रेस्क्यू व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
तेज बहाव में फंसा एक मजदूर करीब दो घंटे तक पत्थर पकड़कर जिंदगी बचाने की जद्दोजहद करता रहा, लेकिन आखिरकार पानी की तेज धारा उसे बहाकर ले गई।
बताया जा रहा है कि गोरखपुर निवासी एक मजदूर निर्माणाधीन भवन के पास बह रही निर्माण सामग्री को बचाने की कोशिश के दौरान तेज बहाव की चपेट में आ गया। किसी तरह वह नदी के बीच एक पत्थर तक पहुंचा और उसे पकड़कर खुद को बचाए रखा। करीब दो घंटे तक वह पानी के बीच फंसा रहा और लगातार मदद के लिए आवाज लगाता रहा। नदी किनारे और पुलिया पर बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे, लेकिन पानी का बहाव इतना खतरनाक था कि कोई उसके पास जाने की हिम्मत नहीं जुटा सका।
स्थानीय लोगों को उम्मीद थी कि प्रशासन की रेस्क्यू टीम जल्द मौके पर पहुंचेगी। समय बीतता गया, लेकिन मजदूर की स्थिति लगातार गंभीर होती गई। आखिरकार उसका हाथ पत्थर से छूट गया और वह तेज बहाव में बह गया। घटना के कई घंटे बाद तक उसका कोई पता नहीं चल सका। इस घटना के बाद स्थानीय लोगों में प्रशासनिक रेस्क्यू व्यवस्था को लेकर नाराजगी देखी जा रही है। लोगों के मुताबिक मऊगंज मुख्यालय से नईगढ़ी की दूरी करीब 12 किलोमीटर है, फिर भी राहत और बचाव दल के पहुंचने में कथित तौर पर काफी समय लगा।
बाढ़ के बीच निर्माणाधीन भवन की छत पर तीन अन्य मजदूर भी घंटों तक फंसे रहे। बताया गया कि सुबह करीब 7 बजे से दोपहर 2 बजे तक वे मदद की प्रतीक्षा करते रहे। चारों तरफ बढ़ते पानी के बीच भूख-प्यास और जान का खतरा बना रहा। वहीं नईगढ़ी के कई वार्डों में पानी भरने से लोगों का जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। तहसील कार्यालय और छात्रावासों तक में पानी पहुंचने की जानकारी सामने आई है, जबकि सड़कों पर नदी जैसा तेज बहाव नजर आ रहा है।
नईगढ़ी की घटना ने प्रशासनिक तैयारियों पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल है कि संवेदनशील इलाकों में समय रहते पर्याप्त रेस्क्यू टीम और संसाधन क्यों नहीं पहुंच सके? निर्माणाधीन भवन में मजदूरों की सुरक्षा के क्या इंतजाम थे? साथ ही, दो घंटे तक मदद की गुहार लगाने वाले मजदूर को समय पर बचाया क्यों नहीं जा सका? एक ओर ठेकेदार की कथित लापरवाही के आरोप हैं, तो दूसरी ओर प्रशासनिक रेस्क्यू व्यवस्था भी सवालों के घेरे में है। अब पूरे मामले की निष्पक्ष जांच जरूरी है, ताकि जिम्मेदारी तय होने के साथ भविष्य में ऐसी त्रासदी की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।