इंदौर की स्मार्ट सड़क का पानी से सामना (सोर्स- सोशल मीडिया)
इंदौर

देश के सबसे साफ शहर 'इंदौर' की स्मार्ट सड़क का पानी से सामना, उखड़ती दिखी सड़क; पीएमओ तक हुई शिकायत

Indore Smart Road Reality: इंदौर में ₹40 करोड़ की 'आदर्श सड़क' की खुली पोल, गोराकुंड चौराहे के पास पाइपलाइन टेस्टिंग के दौरान अचानक धंसी सड़क, सीसीटीवी में कैद हुआ तेज पानी का बहाव।

अंशुल मुकाती, सजल रघुवंशी

Indore Road Quality Iissue: इंदौर में स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत करीब 40 करोड़ रुपए की लागत से तैयार की गई आदर्श सड़क की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। बड़ा गणपति से कृष्णपुरा छत्री तक बनाई गई इस सड़क पर सोमवार सुबह पानी की पाइपलाइन की प्रेशर टेस्टिंग के दौरान गोराकुंड चौराहे के पास अचानक सड़क का एक हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया।

घटना का सीसीटीवी वीडियो भी सामने आया है, जिसमें सड़क फूटने के बाद तेज गति से पानी बाहर निकलता दिखाई दे रहा है।

सड़क के नीचे से निकला तेज पानी, राहगीरों में मची अफरा-तफरी

स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत इस सड़क को आधुनिक तकनीक और बेहतर सुविधाओं के साथ तैयार किया गया था। इसके नीचे पानी, सीवर और अन्य यूटिलिटी लाइनों का नेटवर्क भी बनाया गया है। बताया गया कि पाइपलाइन की टेस्टिंग के दौरान अचानक दबाव बढ़ा, जिसके बाद पाइपलाइन के आसपास का हिस्सा धंस गया। देखते ही देखते सड़क के नीचे से पानी का तेज बहाव निकलने लगा। अचानक हुई घटना से सड़क से गुजर रहे वाहन चालक और राहगीर भी घबरा गए। जिस सड़क को लंबे समय तक टिकाऊ और आदर्श मॉडल के तौर पर पेश किया गया था, उसकी मजबूती पर अब सवाल उठ रहे हैं।

स्मार्ट सिटी के कामों की गुणवत्ता पर राजेंद्र राठौड़ ने उठाए सवाल

घटना के बाद नगर निगम और निर्माण एजेंसी की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं। नगर निगम की एमआईसी सदस्य एवं जानकारी समिति प्रभारी राजेंद्र राठौड़ ने स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत हुए निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि करीब एक हजार करोड़ रुपए की लागत से हुए स्मार्ट सिटी के कई काम शुरुआत से ही गुणवत्ता को लेकर विवादों में रहे हैं। राठौड़ के मुताबिक उन्होंने पहले भी तत्कालीन महापौर और नगर निगम आयुक्त को निर्माण कार्यों की गुणवत्ता के संबंध में शिकायत की थी, लेकिन कार्रवाई नोटिस तक सीमित रही। उन्होंने आरोप लगाया कि जिन अधिकारियों के कार्यकाल में निर्माण हुआ, वे बाद में इंदौर से स्थानांतरित हो गए और अब इसकी कीमत जनता चुका रही है।

जांच की मांग, तय होगी किसकी जिम्मेदारी?

राठौड़ ने भ्रष्टाचार की आशंका जताते हुए प्रधानमंत्री कार्यालय, केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल खट्टर, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय को पत्र लिखकर निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। उनका कहना है कि चार वर्ष पहले करोड़ों रुपए खर्च होने के बावजूद सड़क पर बार-बार डामरीकरण की जरूरत पड़ना भी निर्माण गुणवत्ता पर सवाल खड़ा करता है। अब नगर निगम और निर्माण एजेंसी के सामने क्षतिग्रस्त सड़क की मरम्मत के साथ पूरी परियोजना की तकनीकी जांच की चुनौती है। सवाल यह है कि टेस्टिंग के दौरान ही सड़क टूटने के मामले में जिम्मेदारी तय होगी या जांच और नोटिस तक ही कार्रवाई सीमित रह जाएगी।

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