Indore First Rain Exposed The Corporation: देश के सबसे स्वच्छ शहर के रूप में पहचान बना चुका इंदौर एक बार फिर बारिश के बाद जलभराव की समस्या से जूझता नजर आया। बुधवार शाम हुई मानसून की पहली तेज बारिश ने नगर निगम के जल निकासी और मानसून पूर्व तैयारियों के दावों की हकीकत सामने ला दी। शहर के कई हिस्सों में सड़कों पर पानी भर गया, जिससे आम लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
बारिश के बाद शहर के व्यस्त इलाकों में शामिल बंगाली चौराहा और रोबोट चौराहा जलमग्न दिखाई दिए। सड़कों पर कई फीट तक पानी जमा होने से यातायात प्रभावित हुआ। वाहन चालकों को लंबा इंतजार करना पड़ा और कई दोपहिया वाहन पानी में बंद हो गए। लोगों ने सोशल मीडिया पर भी जलभराव की तस्वीरें और वीडियो साझा कर प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर सवाल उठाए।
मानसून से पहले इंदौर नगर निगम ने शहर में जलभराव की समस्या से निपटने के लिए व्यापक तैयारियों का दावा किया था। महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने कहा था कि बारिश के मौसम को देखते हुए नगर निगम ने नालों की सफाई, जल निकासी व्यवस्था को दुरुस्त करने और आपात स्थिति से निपटने के लिए विशेष स्पेशल टास्क फोर्स का गठन किया है। दावा किया गया था कि बारिश के दौरान किसी भी क्षेत्र में जलभराव की स्थिति नहीं बनने दी जाएगी। लेकिन मानसून की पहली ही तेज बारिश में शहर के कई प्रमुख चौराहों और निचले इलाकों में पानी भर गया। इससे निगम की तैयारियों और दावों पर सवाल खड़े हो गए हैं।
शहर की कई निचली बस्तियों और रहवासी क्षेत्रों में पानी घरों के आसपास तक पहुंच गया। जल निकासी की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने के कारण लोगों को घंटों तक पानी भराव की समस्या झेलनी पड़ी। रहवासियों का कहना है कि हर साल मानसून से पहले नालों की सफाई और जल निकासी सुधार के दावे किए जाते हैं, लेकिन पहली ही बारिश में हालात बिगड़ जाते हैं।
इंदौर को स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित किया जा रहा है, लेकिन पहली बारिश ने शहर के बुनियादी ढांचे की कमजोरियां उजागर कर दीं। जिन क्षेत्रों में करोड़ों रुपये के विकास कार्य किए गए हैं, वहां भी जलभराव देखने को मिला। इससे नागरिकों के बीच स्मार्ट सिटी परियोजनाओं की गुणवत्ता और प्रभावशीलता को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।
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कांग्रेस शहर अध्यक्ष चिंटू चौकसे ने नगर निगम से जलभराव की समस्या के स्थायी समाधान की मांग की है। कांग्रेस का कहना है कि केवल कागजी तैयारियों से काम नहीं चलेगा, बल्कि बारिश से पहले जमीनी स्तर पर प्रभावी व्यवस्थाएं सुनिश्चित करनी होंगी ताकि हर वर्ष होने वाली इस समस्या से शहरवासियों को राहत मिल सके।