कलेक्ट्रेट पहुंचे लोग फोटो सोर्स- नवभारत
डिण्‍डौरी

डिंडौरी में जनसंघर्ष मोर्चा का आंदोलन: रोजगार से लेकर बांध परियोजना की मांग लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचे सैकड़ों लोग

Jan Sangharsh Morcha Protest : डिंडौरी में जनसंघर्ष मोर्चा के जन आंदोलन में रोजगार, समान वेतन, वनाधिकार, ग्रामसभा की स्वायत्तता और बांध परियोजनाओं से जुड़ी कई मांगें उठाई गईं।

दीपक ताम्रकार, प्रीतेश जैन

Dindori Jan Andolan : रोजगार, मानदेय, समान कार्य के लिए समान वेतन, आदिवासी अधिकार और ग्रामसभा की स्वायत्तता समेत कई मुद्दों को लेकर डिंडौरी में जनसंघर्ष मोर्चा महाकौशल के बैनर तले जन आंदोलन किया गया। आंदोलन को जयस, भारतीय मजदूर संघ समेत कई संगठनों का समर्थन मिला। प्रदर्शन के दौरान डिंडौरी विधायक ओमकार सिंह मरकाम, जयस प्रदेश अध्यक्ष इंद्रपाल मरकाम और आदिवासी कांग्रेस प्रदेश सह सचिव महेंद्र परस्ते सहित विभिन्न संगठनों के पदाधिकारी मौजूद रहे।

आंदोलन के दौरान बड़ी संख्या में लोग अपनी मांगों को लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचे। सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए परिसर में पुलिस बल तैनात किया गया था। प्रदर्शनकारियों ने रोजगार, मानदेय, वनाधिकार, पेसा कानून और बांध प्रभावित परिवारों से जुड़े मुद्दों के निराकरण की मांग प्रशासन के सामने रखी।

संदीप दीक्षित ने सरकार की नीतियों पर उठाए सवाल

जन आंदोलन से पहले डिंडौरी बायपास पर जिला सम्मेलन आयोजित किया गया। इसमें रचनात्मक कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष संदीप दीक्षित ने सम्मेलन को संबोधित करते हुए डिंडौरी और आसपास के क्षेत्रों में प्रस्तावित बांध परियोजनाओं को लेकर सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि आदिवासियों को डराया-धमकाया जा रहा है और उन्हें उनके अधिकारों का पूरा लाभ नहीं मिल रहा है।

हटाए कर्मचारियों की बहाली की मांग

प्रदर्शनकारियों ने रसोई मित्र, पेसा मोबिलाइजर और संविदा प्रेरक शिक्षकों को तत्काल सेवा में वापस लेने की मांग की। इसके अलावा रसोई मित्र, किसान मित्र, किसान दीदी, आउटसोर्स लाइनमैन, सांझा चूल्हा रसोइयों और मनरेगा मेट को सम्मानजनक और नियमित वेतन देने की मांग भी ज्ञापन में शामिल रही।

समान काम के लिए समान वेतन की मांग

आंदोलनकारियों ने समान कार्य के लिए समान वेतन का सिद्धांत लागू करने पर जोर दिया। मध्यान्ह भोजन के बिलों का समय पर भुगतान करने और स्व-सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं से बिना पारिश्रमिक काम कराने की व्यवस्था खत्म करने की मांग भी उठाई गई।

ग्रामसभा की सहमति के बिना बांध निर्माण नहीं

डिंडौरी जिले और आसपास के सरहदी जिलों में प्रस्तावित बांध परियोजनाओं को लेकर आंदोलनकारियों ने पारदर्शिता की मांग की। उनका कहना है कि जिन परियोजनाओं की प्रक्रिया अवैध तरीके से आगे बढ़ाई गई है, उन्हें निरस्त किया जाए। साथ ही बांध प्रभावित ग्रामसभाओं को पर्याप्त जानकारी और परामर्श दिए बिना किसी भी परियोजना का निर्माण कार्य शुरू नहीं करने की मांग रखी गई।

ग्रामीणों पर दर्ज प्रकरण वापस लेने की मांग

पंचायत प्रतिनिधियों और ग्रामीण मुखियाओं पर दर्ज प्रकरणों को समाप्त करने की मांग भी आंदोलन के दौरान सामने आई। इसके साथ ही पेसा कानून और वनाधिकार कानून को उनकी मूल भावना के अनुरूप प्रभावी तरीके से लागू करने की मांग की गई, ताकि आदिवासी क्षेत्रों में स्थानीय समुदायों के अधिकार सुरक्षित रह सकें।

तीन महीने में वनाधिकार दावों के निराकरण की मांग

वनाधिकार कानून के तहत लंबित दावों का पारदर्शी प्रक्रिया के जरिए तीन महीने के भीतर निराकरण करने की मांग की गई। वहीं किसानों की फसल चराई से जुड़े मामलों में वन विभाग की कार्रवाई को लेकर भी प्रदर्शनकारियों ने सख्त कदम उठाने की मांग रखी।

ग्रामसभा के फैसलों को प्राथमिकता देने की मांग

ज्ञापन में हितग्राही चयन, निर्माण कार्य और भुगतान जैसे मामलों में ग्रामसभा के निर्णयों को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की बात कही गई। आंदोलनकारियों ने ग्रामसभा और ग्राम पंचायतों को वास्तविक स्वायत्तता के साथ काम करने देने की मांग करते हुए कहा कि रोजगार, वनाधिकार, बांध प्रभावित परिवारों और स्थानीय स्वशासन से जुड़े मामलों का पारदर्शी तरीके से समाधान होना चाहिए।

Delhi Rally: रामलीला मैदान में INDIA गठबंधन की महारैली; देशभर से जुटे विपक्षी नेता, CEC का इस्तीफा रहा मुद्दा

रामलीला मैदान रैली में 1 KM लंबी वोटर लिस्ट लेकर पहुंचे कांग्रेस कार्यकर्ता, देखें VIDEO

स्कूल में छात्रा पर आरी से हमला करने वाले आरोपी का एनकाउंटर, पुलिस के साथ मुठभेड़ में लगी 6 गोली; देखें VIDEO

समालखा: 79वें निरंकारी संत समागम के बाद 126 जोड़ों का विवाह, सतगुरु माता सुदीक्षा जी ने दिया आशीर्वाद

न्याय के लिए दिल्ली आने की जरूरत नहीं होनी चाहिए, CJI सूर्यकांत ने क्यों कही यह बात?