चार साल भी नहीं टिक पाया वन विभाग का तालाब, बारिश में फूटने से खेतों में पहुंचा मलबा, फसलें बर्बाद

Dindori Dam Breach : डिंडौरी के टिकरा बांधा में चार साल पहले बना वन विभाग का तालाब बारिश में फूट गया। पानी और मलबा खेतों में पहुंचने से किसानों की फसलें बर्बाद हुईं।
Dindori Forest Department Pond Breach
डिंडौरी में वन विभाग का तालाब फूटने से किसानों की फसलें बर्बाद(फोटो सोर्स- नवभारत)
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Dindori Forest Department Pond : आदिवासी बहुल डिंडौरी जिले में लगातार हो रही बारिश ने एक बार फिर सरकारी निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मेंहदवानी वन परिक्षेत्र के टिकरा बांधा गांव में करीब चार साल पहले वन विभाग द्वारा बनाया गया तालाब तेज बारिश के बीच अचानक फूट गया। तालाब टूटने के बाद पानी और मलबा तेज बहाव के साथ आसपास के खेतों में पहुंच गया, जिससे कई किसानों की खड़ी फसलें प्रभावित हुई हैं।

मामला मेंहदवानी इलाके के टिकरा बांधा गांव का है। लगातार बारिश के बीच वन विभाग का तालाब बीच से टूट गया। तालाब का पानी बाहर निकलने के साथ बड़ी मात्रा में मिट्टी और मलबा भी आसपास के निचले इलाकों में पहुंच गया। अचानक पानी और मलबे का बहाव आने से किसानों में अफरा-तफरी मच गई।

आधे दर्जन से ज्यादा किसानों की फसल प्रभावित

तालाब से निकला पानी और मलबा आसपास के खेतों में भर गया। इससे खड़ी फसलों को नुकसान पहुंचा है। स्थानीय स्तर पर आधे दर्जन से अधिक और करीब दर्जनभर किसानों की फसलें प्रभावित होने की बात सामने आ रही है। कई खेतों में पानी और मिट्टी जमा होने के कारण फसलें बर्बाद हो गई हैं। किसानों को बारिश के बीच हुए नुकसान से आर्थिक नुकसान की चिंता सताने लगी है।

चार साल में ही टूट गया तालाब, उठे सवाल

तालाब के निर्माण के महज चार साल बाद ही उसके फूट जाने से निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो गए हैं। किसानों का आरोप है कि यदि तालाब का निर्माण निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुसार किया गया होता, तो इतनी कम अवधि में बारिश के दौरान यह स्थिति नहीं बनती। किसानों ने तालाब निर्माण की तकनीकी जांच कराने की मांग की है, ताकि इसकी वास्तविक वजह सामने आ सके।

किसानों ने मुआवजे और सर्वे की मांग की

प्रभावित किसानों ने प्रशासन से पूरे मामले की जांच कराने के साथ ही नुकसान का सर्वे कराने की मांग की है। किसानों का कहना है कि तालाब टूटने से उनके खेतों में पानी और मलबा भर गया है, जिससे खड़ी फसलें खराब हो गई हैं। उन्होंने नियमानुसार फसल नुकसान का उचित मुआवजा देने की मांग की है।

प्रशासन ने राहत का भरोसा दिलाया

मामले की जानकारी मिलने के बाद प्रशासन भी सक्रिय हुआ है। शहपुरा एसडीएम ऐश्वर्य वर्मा ने प्रभावित किसानों को राहत का भरोसा दिलाया है। उन्होंने कहा कि खेतों में हुए नुकसान का सर्वे कराया जाएगा और नियमानुसार पात्र किसानों को मुआवजा दिलाने की कार्रवाई की जाएगी।

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जांच के बाद सामने आएगी निर्माण की हकीकत

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि लाखों रुपये की लागत से करीब चार साल पहले बनाया गया तालाब इतनी जल्दी कैसे फूट गया। क्या निर्माण के दौरान गुणवत्ता मानकों का पालन किया गया था और तालाब की संरचना बारिश के दबाव को झेलने में सक्षम थी या नहीं, इसकी जांच जरूरी है। निर्माण में इस्तेमाल सामग्री और तकनीकी गुणवत्ता की जांच के बाद ही तालाब टूटने की वास्तविक वजह सामने आ सकेगी।

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