धार भोजशाला (फोटो सोर्स- नवभारत) 
धार

भोजशाला विवाद: सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार से कहा- मुस्लिमों को नमाज के लिए वैकल्पिक जगह दें

Dhar Bhojshala News:धार भोजशाला विवाद में SC ने मुस्लिम पक्ष की याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति दी। फिलहाल परिसर में नमाज की अनुमति नहीं दी गई, जबकि ASI को संरचनात्मक बदलाव पर रोक के निर्देश दिए गए।

प्रीतेश जैन

Bhojshala Supreme Court Hearing : धार स्थित ऐतिहासिक भोजशाला-कमाल मौला परिसर विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष को राहत देते हुए उनकी याचिकाओं पर सुनवाई के लिए सहमति दे दी है। हालांकि, अदालत ने फिलहाल भोजशाला परिसर के भीतर नमाज की अनुमति देने से इनकार कर दिया। इसके साथ ही मध्य प्रदेश सरकार को निर्देश दिया गया है कि शुक्रवार को दोपहर 1 से 3 बजे के बीच नमाज अदा करने के लिए परिसर से सटे किसी खुले स्थान की व्यवस्था की जाए।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहन की पीठ ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के 15 मई 2026 के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर नोटिस जारी किए। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में भोजशाला-कमाल मौला परिसर को मां सरस्वती का मंदिर माना था और परिसर में नमाज अदा करने पर रोक लगा दी थी।

HC के आदेश पर अंतरिम रोक से इनकार

सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल हाईकोर्ट के आदेश पर कोई अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया। इसका मतलब है कि हाईकोर्ट के फैसले के बाद लागू व्यवस्था फिलहाल जारी रहेगी। हालांकि, अदालत ने सभी पक्षों से जवाब मांगते हुए मामले को अंतिम सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने के निर्देश दिए हैं। संकेत दिए गए हैं कि करीब तीन सप्ताह बाद विस्तृत सुनवाई की जा सकती है।

सालों की धार्मिक व्यवस्था बदल गई

सुनवाई के दौरान मुस्लिम पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता हुजेफा अहमदी ने दलील दी कि हाईकोर्ट के फैसले से वर्षों से चली आ रही धार्मिक व्यवस्था पूरी तरह बदल गई है। उन्होंने कहा कि लंबे समय से शुक्रवार को मुस्लिम समुदाय नमाज अदा करता था, जबकि मंगलवार को हिंदू पक्ष को पूजा की अनुमति थी। उन्होंने एएसआई की सर्वे रिपोर्ट और उसके आधार पर दिए गए निष्कर्षों पर भी सवाल उठाए।

नमाज के सरकारी अभिलेख मौजूद

वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने भी मुस्लिम पक्ष का पक्ष रखते हुए कहा कि हाईकोर्ट का फैसला पूजा स्थल (विशेष उपबंध) अधिनियम, 1991 की भावना के विपरीत है। उन्होंने तर्क दिया कि परिसर में नमाज अदा किए जाने के समर्थन में कई सरकारी अभिलेख मौजूद हैं और लंबे समय से चली आ रही व्यवस्था को बदला नहीं जाना चाहिए। वहीं, केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि हाईकोर्ट के फैसले के बाद प्रशासन ने स्थिति को शांतिपूर्ण ढंग से संभाला है और कहीं भी कानून-व्यवस्था की समस्या उत्पन्न नहीं हुई।

सुप्रीम कोर्ट ने ASI को दिए निर्देश

इस बीच सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) को भी निर्देश दिया कि अदालत की पूर्व अनुमति के बिना भोजशाला परिसर में किसी भी प्रकार का संरचनात्मक बदलाव नहीं किया जाएगा। अब इस बहुचर्चित मामले में अंतिम कानूनी लड़ाई सुप्रीम कोर्ट में होगी, जहां एएसआई की रिपोर्ट, ऐतिहासिक दस्तावेजों और दोनों पक्षों की दलीलों के आधार पर आगे फैसला लिया जाएगा।

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