

Datia Bypoll Star Campaigners: दतिया विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव ने प्रदेश की राजनीति को गरमा दिया है। एक ओर जहां भाजपा ने इस सीट को जीतने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी है, वहीं कांग्रेस ने भी अपनी रणनीति को धार देना शुरू कर दिया है। दोनों ही पार्टियों ने अपने स्टार प्रचारकों की सूची सामने आई है, जिससे यह स्पष्ट हो गया है कि इस बार का मुकाबला कितना दिलचस्प होने वाला है।
भाजपा की ओर से जारी स्टार प्रचारकों की सूची इस बात का संकेत है कि पार्टी इस सीट को किसी भी कीमत पर गवाना नहीं चाहती। 11 जुलाई को प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल द्वारा भेजी गई इस सूची में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष विष्णु दत्त शर्मा प्रचार की कमान संभालेंगे।
सूची में पूर्व मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान, ज्योतिरादित्य सिंधिया और वीरेंद्र कुमार खटीक जैसे बड़े चेहरों को शामिल किया गया है। इसके अलावा, राज्य के दोनों उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा और राजेंद्र शुक्ल, साथ ही वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री प्रहलाद पटेल, कैलाश विजयवर्गीय और राकेश सिंह भी दतिया में वोट मांगते नजर आएंगे।
खास बात यह है कि इस सूची में पूर्व गृहमंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा को शामिल किया गया है, जो इस पूरे बड़े पैनल में दतिया के इकलौते स्थानीय चेहरा नजर आते हैं। राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा जोरों पर है कि स्थानीय स्तर पर मजबूत नेतृत्व की कमी के चलते भाजपा को दिल्ली और भोपाल के दिग्गजों पर निर्भर रहना पड़ रहा है।
कांग्रेस ने 13 जुलाई को महासचिव मुकुल वासनिक के माध्यम से अपनी सूची चुनाव आयोग को भेजी है। कांग्रेस ने इस बार अनुभवी चेहरों पर दांव खेला है। सूची में दतिया के पूर्व विधायक राजेन्द्र भारती और सेंवढ़ा के पूर्व विधायक राधेलाल बघेल को शामिल किया गया है, जो स्थानीय पकड़ के लिए जाने जाते हैं। इनके साथ फूल सिंह बरैया और महेंद्र बौद्ध को भी स्टार प्रचारक बनाया गया है।
दिलचस्प यह है कि दतिया से टिकट के मुख्य दावेदारों में शामिल अवधेश नायक को इस सूची में जगह नहीं मिली है। कांग्रेस की इस रणनीति को चुनाव में पार्टी के भीतर संतुलन बनाने और अनुभवी नेताओं के अनुभव का लाभ उठाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
दतिया उपचुनाव अब केवल एक विधानसभा सीट का चुनाव नहीं, बल्कि दोनों पार्टियों के लिए साख का प्रश्न बन गया है। भाजपा जहाँ केंद्रीय मंत्रियों और वरिष्ठ नेताओं की भारी-भरकम फौज के साथ मैदान में है, वहीं कांग्रेस ने अपने पुराने और अनुभवी दिग्गजों के दम पर चुनावी वैतरणी पार करने की तैयारी की है। आने वाले दिन ही तय करेंगे कि जनता 'बाहरी' दिग्गज नेताओं की अपील को तरजीह देती है या 'स्थानीय' चेहरों के साथ चलती है।