शहीद दिलीप पुरी की अंतिम विदाई पर भावुक हुए एसपी आदित्य मिश्रा।
दिलीप पुरी की शाहदात की खबर सुनकर उनके पैतृक गांव बरमंडल में पसरा मातम।
अवैध शराब से भरे ट्रक की चपेट में आने से हुई टीआई की मौत।
पूरी घटना ने खड़े किए कई बड़े सवाल।
TI Dilip Puri Last Rite SP Aditya Mishra Emotional: जब तक सूरज चांद रहेगा दिलीप पुरी जी का नाम रहेगा...अपने साथी दिलीप पुरी की अंतिम विदाई में हर किसी की आंखें नम थी। देवास एसपी आदित्य मिश्रा खातेगांव विधायक आशीष शर्मा, पुलिस अधिकारियों और स्थानीय नागरिकों ने उन्हें पुष्पांजलि अर्पित की।
शहीद टीआई दिलीप पुरी की अंतिम विदाई के वक्त माहौल काफी भावुक नजर आया। देवास एसपी भी भावुक नजर आए। नजारे को देखकर ऐसा लग रहा था कि मानों पुलिस महकमें ने अपने एक मजबूत सिपाही को आज खो दिया हो।
शहीद टीआई दिलीप पुरी को खातेगांव थाना परिसर में गार्ड ऑफ ऑनर और श्रद्धांजलि दी गई। एसपी आदित्य मिश्रा ने टीआई के पार्थिव शरीर को कंधा दिया, इस दौरान पुलिस अधीक्षक काफी ज्यादा भावुक नजर आए। एएसपी एचएन बाथम ने भी टीआई को पुष्प अर्पित किए। टीआई का शव एंबुलेंस से पैतृक गांव के लिए रवाना किया गया।
शहीद दिलीप पुरी मूल रूप से धार जिले की सरदारपुर तहसील के बरमंडल गांव के रहने वाले थे। उनकी मौत की खबर के बाद पूरे गांव में मातम का माहौल पसरा हुआ है। मिली जानकारी के अनुसार उनके पिता ओमप्रकाश पुरी किसान हैं। परिजन और रिश्तेदार उनके घर पहुंचने लगे हैं। उनके छोटे भाई इंदौर में प्राइवेट नौकरी करते हैं।
दरअसल, खातेगांव थाना प्रभारी दिलीप पुरी अपनी टीम के साथ नेमावर रोड हाईवे पर चेकिंग के लिए पहुंचे हुए थे। उन्हें अवैध शराब से भरे ट्रक की जानकारी मिली थी। जिसके चलते उन्होंने चेकिंग अभियान चलाया था। पुलिसकर्मी संदिग्ध वाहनों को रोककर उनकी जांच कर रहे थे। इसी दौरान एक अवैध शराब के ट्रक को रोकने की कार्रवाई की गई। आरोप है कि ट्रक चालक ने वाहन रोकने के बजाय उसकी रफ्तार बढ़ा दी। जिसके बाद ट्रक डिवाइडर पर चढ़ गया और उसका पिछला पहिया उनके ऊपर से गुजरा। जिसमें वह गंभीर रूप से घायल हो गए उन्हें अस्पताल ले जाया गया जहां उन्होंने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया।
पूरी घटना ने खड़े किए कई बड़े सवाल
अवैध शराब का ट्रक आखिर किन लोगों के इशारे पर परिवहन कर रहा था?
शराब तस्करी के इस नेटवर्क के पीछे कौन-कौन लोग शामिल हैं?
क्या तस्करों को राजनीतिक संरक्षण हासिल था?
क्या पहले हुई जहरीली शराब की घटनाओं के बाद भी अवैध कारोबार पर प्रभावी अंकुश नहीं लग पाया?
क्या इस पूरे नेटवर्क में शामिल बड़े चेहरों तक जांच पहुंच पाएगी?