Explainer : TI की हत्या ने खोली कानून व्यवस्था की पोल! आखिर किसके संरक्षण में शराब माफिया के हौसले बुलंद ?

Dewas TI Murder: देवास जिले के खातेगांव में अवैध शराब तस्करी रोकने पहुंचे थाना प्रभारी दिलीप पुरी की ट्रक से कुचलकर हत्या कर दी गई। इस घटना ने पुलिस महकमे में हड़कंप मचा दिया।
Dewas police officer killed by truck
अवैध शराब तस्करी रोकने पहुंचे TI दिलीप पुरी की ट्रक से कुचलकर मौत।फोटो सोर्स - नवभारत डिजाइन इमेज
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Dewas Police Officer Killed by Truck : एमपी में अवैध शराब के कारोबार और तस्करों के हौसले को लेकर एक बार फिर कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। देवास जिले के खातेगांव में अवैध शराब तस्करी रोकने पहुंचे थाना प्रभारी दिलीप पुरी की ट्रक से कुचलकर हत्या कर दी गई। देर रात हुई इस घटना ने पुलिस महकमे में हड़कंप मचा दिया है।

जानकारी के मुताबिक खातेगांव थाना प्रभारी दिलीप पुरी अवैध शराब की तस्करी रोकने के लिए पुलिस टीम के साथ कार्रवाई करने पहुंचे थे। पुलिस अधीक्षक को सूचना मिलने के बाद पांच थानों का पुलिस बल भी मौके पर पहुंचा था। इसी दौरान पुलिस से बचकर भागने की कोशिश कर रहे ट्रक चालक ने कथित तौर पर टीआई दिलीप पुरी पर ट्रक चढ़ा दिया। ट्रक के नीचे दबने से उनकी मौत हो गई।

इस घटना ने एक बार फिर ये सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर अवैध शराब के कारोबार में शामिल लोगों के हौसले इतने बुलंद कैसे हो रहे हैं कि वे कानून के रखवालों पर ही हमला करने से नहीं हिचक रहे।

सुधीर दंडोतिया ने राजनीतिक संरक्षण पर उठाए सवाल

वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक सुधीर दंडोतिया ने खास बातचीत में इसे केवल एक पुलिस अधिकारी की मौत नहीं, बल्कि कानून व्यवस्था और देश के लिए बेहद शर्मनाक घटना बताया। उनका कहना है कि इस पूरे मामले में सबसे पहले उन लोगों की पहचान होनी चाहिए जो शराब तस्करों को राजनीतिक संरक्षण देते हैं।

दंडोतिया के मुताबिक राजनीतिक संरक्षण के चलते ही तस्करों के हौसले इतने बुलंद हो जाते हैं कि वे पुलिस और कानून को चुनौती देने से भी पीछे नहीं हटते। ऐसे मामलों में कभी सत्ता पक्ष तो कभी विपक्ष से जुड़े लोगों के नाम सामने आते रहे हैं।

इसलिए जांच सिर्फ ट्रक चालक या शराब तस्करी में शामिल लोगों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए बल्कि उन लोगों तक भी पहुंचनी चाहिए जो पर्दे के पीछे से इस अवैध कारोबार को संरक्षण दे रहे हैं।

उन्होंने कहा कि शराब माफिया के खिलाफ कार्रवाई के साथ साथ उन्हें संरक्षण देने वालों की भी जवाबदेही तय होनी चाहिए। जब तक संरक्षण देने वाले लोगों पर कार्रवाई नहीं होगी तब तक इस तरह के अवैध कारोबार पर प्रभावी रोक लगाना मुश्किल होगा।

Dewas police officer killed by truck
खातेगांव TI दिलीप पुरी की मौत की जांच करेंगे DG उपेंद्र जैन, हरदा से गुजरात जा रहा था शराब से भरा ट्रक

बीजेपी प्रदेश उपाध्यक्ष ने कांग्रेस को घेरा

सुरेंद्र शर्मा ने इस मामले में सोशल मीडिया पर पोस्ट कर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी पर सवाल उठाए हैं। उन्होने लिखा 'कांग्रेस का हाथ,शराब माफिया के साथ..जीतू पटवारी ने राहुल जायसवाल को खातेगांव विधानसभा का प्रभारी क्या इसीलिए बनाया था कि उनक शराब का धंधा दो दो जिलों में चल सके?? आपकी इस कृपा का दुष्परिणाम एक पुलिस अधिकारी को प्राण गंवाने पड़े। अपराधी कितने भी ताकतवर हों उनके पीछे कोई भी हो कानून कठोर कार्रवाई करेगा।

देवास में जहरीली शराब कांड के बाद फिर बड़ा सवाल

गौरतलब है कि देवास जिले में ये घटना ऐसे समय हुई है जब हाल ही में चंदाना और बिजाना गांवों में कथित जहरीली शराब के सेवन से कई लोगों की मौत का मामला सामने आया था। उस मामले के बाद जिला प्रशासन और पुलिस महकमे में भी बदलाव किए गए थे। आबकारी विभाग के अधिकारियों पर भी कार्रवाई हुई थी। ऐसे में अब शराब तस्करी रोकने की कार्रवाई के दौरान थाना प्रभारी की मौत ने प्रशासनिक और पुलिस व्यवस्था पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।

जानकारी के मुताबिक जिस वाहन को रोकने की कोशिश की गई, उसमें करीब 1800 लीटर अवैध शराब के 208 बॉक्स होने की जानकारी सामने आई है। मामले की जांच के लिए एसआईटी गठित किए जाने की भी जानकारी सामने आई है।

पूरी घटना ने खड़े किए कई बड़े सवाल

  1. अवैध शराब का ट्रक आखिर किन लोगों के इशारे पर परिवहन कर रहा था?

  2. शराब तस्करी के इस नेटवर्क के पीछे कौन-कौन लोग शामिल हैं?

  3. क्या तस्करों को राजनीतिक संरक्षण हासिल था?

  4. क्या पहले हुई जहरीली शराब की घटनाओं के बाद भी अवैध कारोबार पर प्रभावी अंकुश नहीं लग पाया?

  5. क्या इस पूरे नेटवर्क में शामिल बड़े चेहरों तक जांच पहुंच पाएगी?

घटना के बाद कांग्रेस नेताओं ने भी प्रदेश सरकार और कानून व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। शराब माफिया और कथित राजनीतिक संरक्षण को लेकर सरकार को घेरा गया है।

सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब अवैध शराब की तस्करी रोकने पहुंचे पुलिस अधिकारी ही सुरक्षित नहीं हैं, तो आम नागरिकों की सुरक्षा की जिम्मेदारी कौन लेगा? क्या इस मामले में सिर्फ ट्रक चालक और तस्करी में शामिल लोगों पर कार्रवाई होगी या फिर उन राजनीतिक और प्रशासनिक चेहरों तक भी जांच पहुंचेगी, जिन पर संरक्षण देने के आरोप लगते रहे हैं?