MP UCC Bill Assembly Debate : मध्यप्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान मंगलवार को सरकार ने अनुपूरक बजट सदन में पेश किया। बजट पर बुधवार को एक घंटे तक चर्चा होगी। इसके बाद सदन में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक पर चर्चा शुरू हुई, जिसमें सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली।
यूसीसी विधेयक पर चर्चा के दौरान कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने कहा कि यह कानून लाकर एक वर्ग विशेष को निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने मांग की कि विधेयक को पहले प्रवर समिति (सेलेक्ट कमेटी) के पास भेजा जाए, ताकि विस्तृत जांच-पड़ताल के बाद ही इसे सदन में पारित किया जाए।
आरिफ मसूद ने कहा कि गुजरात में भी यूसीसी अभी लागू नहीं हुई है, वहां केवल कैबिनेट ने इसे मंजूरी दी है। उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 29 का हवाला देते हुए कहा कि अल्पसंख्यकों को मिले संवैधानिक अधिकारों का संरक्षण बनाए रखा जाना चाहिए।
वहीं, संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने पॉइंट ऑफ ऑर्डर के तहत कांग्रेस के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि यह विधेयक केवल सरकार की पहल नहीं, बल्कि जनता के सुझावों के आधार पर तैयार किया गया है। उन्होंने कहा कि यूसीसी की अवधारणा अन्य राज्यों में भी लागू की जा रही है और यह "एक देश, एक निशान, एक विधान, एक प्रधान" की भावना के अनुरूप है। कैलाश विजयवर्गीय ने दावा किया कि यूसीसी के संबंध में प्रदेशभर से करीब 10 लाख लोगों ने अपने सुझाव और मत दिए हैं, इसलिए यह विधेयक जनभावनाओं का प्रतिबिंब है।
ये भी पढ़ें : MP विधानसभा: यूसीसी पर चर्चा से पहले कांग्रेस का विरोध प्रदर्शन, नाटक और सांकेतिक शव लेकर सरकार पर साधा निशाना
इस दौरान कांग्रेस विधायक आतिफ अकील ने भी विधेयक का विरोध किया। उन्होंने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 29 के तहत अल्पसंख्यकों को संरक्षण प्राप्त है और आदिवासियों की तरह अल्पसंख्यक समुदाय के अधिकारों का भी संरक्षण किया जाना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि जब केंद्र सरकार ने अभी तक यूसीसी लागू नहीं की है, तो मध्यप्रदेश में इसे जल्दबाजी में लाने की क्या आवश्यकता है।आतिफ अकील ने आरोप लगाया कि समान नागरिक संहिता का मुद्दा राजनीतिक एजेंडे के तहत आगे बढ़ाया जा रहा है। यूसीसी विधेयक को लेकर विधानसभा में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच विस्तृत बहस जारी है।