MP Private Medical College Fees : मध्य प्रदेश में मेडिकल, नर्सिंग, आयुर्वेद, यूनानी और होम्योपैथी कॉलेजों की फीस निर्धारण का रास्ता अब साफ हो गया है। राज्य शासन ने जीवाजी विश्वविद्यालय (ग्वालियर) और अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय (रीवा) के पूर्व कुलगुरु राजकुमार आचार्य को प्रवेश एवं शुल्क विनियामक समिति का नया अध्यक्ष नियुक्त किया है। अध्यक्ष पद रिक्त होने के कारण लंबे समय से फीस निर्धारण की प्रक्रिया अटकी हुई थी, जो अब उनके पदभार ग्रहण करने के साथ ही तेज हो गई है।
नए शैक्षणिक सत्र के लिए प्रदेश के निजी मेडिकल कॉलेजों ने समिति के सामने फीस बढ़ाने का बड़ा प्रस्ताव रखा है। कुछ कॉलेजों ने अपनी फीस 16 लाख रुपये तक करने की मांग की है। हालांकि, समिति की प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, कॉलेजों के उपलब्ध वित्तीय रिकॉर्ड और वास्तविक खर्च के आधार पर यह फीस 9 से 12 लाख रुपये के दायरे में आनी चाहिए। ऐसे में 16 लाख रुपये की भारी-भरकम डिमांड पर समिति ने सवाल खड़े कर दिए हैं।
मेडिकल कॉलेजों की प्रस्तावित फीस वृद्धि के पीछे का वास्तविक खर्च कितना है, यह अब समिति की जांच का मुख्य बिंदु होगा। समिति ने तय किया है कि वह कॉलेजों के प्रस्तावों के साथ-साथ उनके पिछले तीन साल की बैलेंस शीट और आय-व्यय के रिकॉर्ड का कड़ाई से परीक्षण करेगी।
सामान्य सीटों पर फीस निर्धारण से पहले ही एनआरआई कोटे से एमबीबीएस में प्रवेश लेने वाले छात्रों पर महंगाई की तगड़ी मार पड़ी है। पिछले साल जिन कॉलेजों में एनआरआई कोटे की फीस 30 से 55 लाख रुपये के बीच थी, वह अब बढ़कर 33.43 लाख से 60.92 लाख रुपये तक पहुंच गई है।
श्री अरबिंदो मेडिकल कॉलेज (इंदौर): 60 लाख 92 हजार 700 रुपये
एलएन मेडिकल कॉलेज (भोपाल): 53.99 लाख रुपये
पीपुल्स मेडिकल कॉलेज (भोपाल): 53.33 लाख रुपये
अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि विनियामक समिति की सख्ती के बाद सामान्य छात्रों के लिए निजी कॉलेज की अंतिम फीस क्या तय होती है।