MP Medical Colleges PPP Model : मध्य प्रदेश में सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों को पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप यानी PPP मॉडल पर संचालित करने की दिशा में प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। उपलब्ध टेंडर रिकॉर्ड के मुताबिक मध्य प्रदेश पब्लिक हेल्थ सर्विसेज कॉरपोरेशन लिमिटेड ने 9 ब्राउनफील्ड मेडिकल कॉलेज-कम-हॉस्पिटल और 18 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को PPP मोड पर ऑपरेशनलाइज करने के लिए ट्रांजैक्शन एडवाइजर नियुक्त करने का RFP जारी किया है।
प्रस्ताव को लेकर सवाल इसलिए भी उठ रहे हैं क्योंकि सूची में ऐसे मेडिकल कॉलेजों के नाम भी बताए जा रहे हैं, जिन्हें पिछले कुछ समय से सरकारी स्तर पर संचालित किया जा रहा है। इनमें नीमच, सिंगरौली और श्योपुर शामिल हैं। इसके अलावा बुदनी, छतरपुर, दमोह, मंडला और राजगढ़ के मेडिकल कॉलेज भी प्रस्तावित PPP मॉडल में शामिल बताए गए हैं।
प्रस्ताव के मुताबिक इन मेडिकल कॉलेजों के निर्माण और सुविधाओं पर मध्य प्रदेश सरकार की ओर से बड़े स्तर पर राशि खर्च की गई है। दावा है कि 9 मेडिकल कॉलेजों पर करीब 4000 करोड़ रुपये का सरकारी निवेश हुआ है। मंडला और राजगढ़ जैसे कॉलेजों के निर्माण में केंद्र और राज्य सरकार की हिस्सेदारी भी बताई गई है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि सरकारी निवेश से तैयार संस्थानों के संचालन में निजी भागीदारी का मॉडल किस तरह काम करेगा।
इस प्रस्ताव का एक अहम हिस्सा वायबिलिटी गैप फंडिंग यानी VGF भी है। VGF का उद्देश्य ऐसे PPP प्रोजेक्ट को आर्थिक सहायता देना है जो सामाजिक या आर्थिक रूप से जरूरी हों, लेकिन व्यावसायिक तौर पर पर्याप्त रूप से व्यवहार्य न हों। केंद्र की PPP व्यवस्था में मेडिकल कॉलेजों के लिए VGF का प्रावधान पहले से मौजूद है।
ट्रांजैक्शन एडवाइजर की नियुक्ति के बाद पूरी प्रक्रिया को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाने की तैयारी है। प्रस्तावित टाइमलाइन के मुताबिक शुरुआती रिपोर्ट, व्यवहार्यता रिपोर्ट और बोली से जुड़े दस्तावेज तैयार किए जाने हैं। यानी अभी प्रक्रिया सलाहकार की नियुक्ति और मॉडल तैयार करने के चरण में है, जबकि आगे की प्रक्रिया इन दस्तावेजों के आधार पर आगे बढ़ेगी।
PPP मॉडल लागू होने की स्थिति में मेडिकल कॉलेजों में पहले से कार्यरत सरकारी फैकल्टी और कर्मचारियों की भूमिका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। प्रस्ताव के तहत निजी भागीदारी के साथ संस्थानों का संचालन किस ढांचे में होगा और मौजूदा कर्मचारियों की सेवा शर्तों पर इसका क्या असर पड़ेगा, इस पर स्पष्टता की जरूरत बताई जा रही है।
सरकार की ओर से कहा गया है कि PPP मॉडल को पहले ही मंजूरी मिल चुकी है और नीति आयोग द्वारा तैयार टेंडर डॉक्यूमेंट को मध्य प्रदेश में लागू किया जा रहा है। ऐसे में सरकार इसे स्वास्थ्य और मेडिकल शिक्षा के विस्तार से जोड़ रही है। दूसरी ओर, प्रस्ताव को लेकर यह सवाल उठ रहा है कि सरकारी निवेश से तैयार संस्थानों में निजी भागीदारी का आर्थिक और प्रशासनिक ढांचा आखिर किस तरह तय होगा।
मध्य प्रदेश में सरकारी मेडिकल कॉलेजों को PPP मॉडल पर देने की चर्चा नई नहीं है। वर्ष 2021 में उज्जैन मेडिकल कॉलेज को PPP मॉडल पर देने की तैयारी का विरोध हुआ था। अब नए प्रस्ताव में पहले की सूची से बदलाव करते हुए देवास की जगह दमोह को शामिल किए जाने की बात सामने आई है। ऐसे में नए प्रस्ताव पर भी स्वास्थ्य व्यवस्था और सरकारी संस्थानों के भविष्य को लेकर बहस शुरू हो गई है।