

Amerian Congress Passes Tarrif Bill: अमेरिकी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स ने रूस पर कड़े प्रतिबंध लगाने वाला एक बिल पास किया है, जिससे ट्रंप प्रशासन को रूसी तेल खरीदने वाले शीर्ष पांच देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने की इजाजत मिल जाएगी। बिल को 262-159 वोटों से मंजूरी दी गई है। इस कानून से भारत, चीन, स्लोवाकिया, हंगरी और अजरबैजान पर असर पड़ने की संभावना है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भारत अपने 1.4 अरब लोगों की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि भारत ने अपने व्यापार और आर्थिक हितों की रक्षा के लिए सभी जरूरी कदम उठाने का अपना संकल्प भी साफ कर दिया है। हालांकि प्रस्तावित कदमों के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई। सरकार इन नियमों के असर से निपटने के लिए भारतीय व्यापार और उद्योग संगठनों के साथ मिलकर काम करेगी। अमेरिकी कांग्रेस में इस कानून के पारित होने के बाद भारत इससे जुड़ी आगे की गतिविधियों पर नजर रख रहा है।
विदेश मंत्रालय ने कहा कि हाल के महीनों में अमेरिका के अलग-अलग अधिकारियों के साथ इस मुद्दे पर ऊंचे स्तर पर बातचीत हुई है। भारत ने बहुत साफ तौर पर बताया है कि इसके असर न सिर्फ दोनों देशों के रिश्तों पर, बल्कि इंटरनेशनल एनर्जी मार्केट पर भी पड़ सकते हैं। हालांकि रूस अभी भी तेल और गैस का सबसे बड़ा स्रोत बना हुआ है, लेकिन अलग-अलग स्रोतों से सप्लाई लेने की कोशिशों के तहत भारत ने हाल के महीनों में अमेरिका और वेनेजुएला से भी एनर्जी की खरीद बढ़ाई है।
रूस पर प्रतिबंध लगाने वाला बिल पहले 7 अगस्त को अमेरिकी सीनेट में भारी बहुमत से पास हुआ था, और अब यह कानून बनने के लिए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पास जाएगा। अमेरिकी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स ने यह बिल तब पास किया जब बहुमत वाली रिपब्लिकन पार्टी के सदस्यों ने इस विवादित बिल को इस हफ्ते वोटिंग के लिए पेश किया। चीन के बाद रूसी तेल का दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा खरीदार होने के नाते, भारत को 100% तक के अतिरिक्त अमेरिकी टैरिफ का सामना करना पड़ सकता है।