MP हाईकोर्ट ने 15 साल पुराने RTI मामले में अजय दुबे को दी राहत।
तत्कालीन राज्यपाल की केंद्र को भेजी गई रिपोर्टों का कर सकेंगे निरीक्षण।
2011 में अजय दुबे ने RTI के तहत मांगी थी जानकारी।
हाईकोर्ट की डबल बेंच ने पूर्व आदेशों में किया संशोधन।
MP High Court Ajay Dubey Case: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने करीब 15 साल पुराने सूचना के अधिकार (RTI) से जुड़े मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट ने सामाजिक कार्यकर्ता अजय दुबे को तत्कालीन राज्यपाल द्वारा मध्य प्रदेश सरकार की गतिविधियों और प्रदेश की राजनीतिक परिस्थितियों को लेकर केंद्र सरकार को भेजी गई रिपोर्टों का निरीक्षण करने की अनुमति दे दी है।
इस फैसले के बाद अब अजय दुबे संबंधित सरकारी दस्तावेजों और अभिलेखों को देख सकेंगे। हालांकि, प्रमाणित प्रतियां प्राप्त करने के लिए उन्हें निरीक्षण के बाद संबंधित दस्तावेजों का विवरण देते हुए लोक सूचना अधिकारी के समक्ष अलग से आवेदन करना होगा।
इस मामले में मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति अल्पेश वाई. कोगजे और न्यायमूर्ति विवेक जैन की खंडपीठ ने रिट अपील क्रमांक 3441/2026 में आदेश पारित किया। सुनवाई के दौरान अपीलकर्ता अजय दुबे की ओर से अधिवक्ता राजेश चांद ने पक्ष रखा। कोर्ट ने पूर्व में पारित आदेशों में संशोधन करते हुए अपील का अंतिम रूप से निराकरण कर दिया। खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता को पहले संबंधित सरकारी रिकॉर्ड और अभिलेखों का निरीक्षण करने का अवसर दिया जाना चाहिए।
दरअसल, इस पूरे मामले की शुरुआत 12 दिसंबर 2011 को हुई थी। सामाजिक कार्यकर्ता अजय दुबे ने सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के तहत लोक सूचना अधिकारी, राजभवन सचिवालय भोपाल के समक्ष आवेदन प्रस्तुत किया था। इसमें उन्होंने 1 जनवरी 2011 के बाद तत्कालीन राज्यपाल द्वारा मध्य प्रदेश शासन की गतिविधियों और प्रदेश की राजनीतिक परिस्थितियों के संबंध में केंद्र सरकार को भेजी गई रिपोर्टों की जानकारी मांगी थी। उनकी मांग इन रिपोर्टों का माहवार विवरण उपलब्ध कराने की थी।
हाई कोर्ट के आदेश के मुताबिक, अजय दुबे को सबसे पहले संबंधित सरकारी अभिलेखों और रिकॉर्ड्स का निरीक्षण करने की अनुमति दी जाएगी। निरीक्षण के दौरान वह उन दस्तावेजों की पहचान कर सकेंगे, जिनकी प्रमाणित प्रतियां उन्हें चाहिए। इसके बाद उन्हें संबंधित दस्तावेजों का स्पष्ट उल्लेख करते हुए केंद्रीय लोक सूचना अधिकारी के समक्ष आवेदन प्रस्तुत करना होगा। इस तरह कोर्ट ने सूचना प्राप्त करने की प्रक्रिया को दो चरणों में निर्धारित किया है। फैसले से राज्यपाल कार्यालय और केंद्र सरकार के बीच हुए आधिकारिक पत्राचार से जुड़ी जानकारी हासिल करने की उनकी कोशिश को आगे बढ़ने का अवसर मिला है।