दिवाली के बदा इस्तीफा दे सकती हैं निर्मला सप्रे (सोर्स- सोशल मीडिया)
भोपाल

दिवाली के बाद इस्तीफा देंगी निर्मला सप्रे! बीना में होगा उप चुनाव; मध्य प्रदेश की राजनीति में हलचल

Nirmala Sapre Resignation After Diwali: बीना विधायक निर्मला सप्रे पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, तोमर को 2 महीने में निर्णय के निर्देश। सूत्रों के मुताबिक दिवाली बाद दे सकती हैं इस्तीफा।

सुधीर दंडोतिया, सजल रघुवंशी

HIGHLIGHTS:

  • निर्मला सप्रे दिवाली के बाद इस्तीफा दे सकती हैं।

  • दल-बदल याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने दिया बड़ा निर्देश।

  • विधानसभा अध्यक्ष को दो महीने में फैसला करने का आदेश।

  • 2023 में कांग्रेस के टिकट पर बीना से जीती थीं सप्रे।

Nirmala Sapre Resignation News: मध्य प्रदेश की राजनीति में से इस वक्त बड़ी खबर निकल कर आ रही है। सूत्रों की मानें तो पता चला है कि निर्मला सप्रे दिवाली तक अपना इस्तीफा सौंप सकती हैं।

दरअसल, बीना से कांग्रेस के टिकट पर विधायक निर्मला सप्रे के खिलाफ दायर दल बदल याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा निर्देश दिया है। शीर्ष अदालत ने विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर को दो महीने के अंदर अयोग्यता याचिका पर फैसला करने को कहा है। इस आदेश के बाद अब निर्मला सप्रे की विधायकी का भविष्य विधानसभा अध्यक्ष के निर्णय पर टिका हुआ है।

दिवाली के बाद निर्मला सप्रे देंगी इस्तीफा

गौरतलब है कि, सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद अब सबकी नजर निर्मला सप्रे पर है। उनकी विधायकी को लेकर कई तरह के सवाल उठ रहे हैं। इसी बीच सूत्रों के हवाले से सबसे बड़ी खबर यह निकल कर आ रही है कि दिवाली के बाद निर्मला सप्रे इस्तीफा दे सकती हैं।

2023 में कांग्रेस से जीतीं, 2024 में BJP के मंच पर दिखीं

निर्मला सप्रे ने 2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के टिकट पर बीना सीट से जीत दर्ज की थी। हालांकि लोकसभा चुनाव 2024 के दौरान उनकी राजनीतिक गतिविधियों को लेकर विवाद शुरू हो गया। मई 2024 में वो सीएम मोहन यादव की मौजूदगी में बीजेपी के मंच पर पहुंचीं। इसके बाद उनके बीजेपी में शामिल होने की चर्चाएं तेज हो गईं। कांग्रेस ने इसे दल बदल का मामला बताते हुए उनकी विधानसभा सदस्यता समाप्त करने की मांग की।

उमंग सिंघार ने दाखिल की थी अयोग्यता याचिका

नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने 30 जून 2024 को विधानसभा अध्यक्ष के सामने निर्मला सप्रे के खिलाफ अयोग्यता याचिका दाखिल की थी। कांग्रेस का आरोप था कि सप्रे ने पार्टी छोड़कर बीजेपी का साथ दिया और चुनाव प्रचार में भी सक्रिय रहीं। लंबे समय तक इस मामले में अंतिम निर्णय नहीं होने के बाद कांग्रेस ने न्यायालय का रुख किया।

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