

Highlights:
सुप्रीम कोर्ट ने विधानसभा अध्यक्ष को दो महीने में फैसला करने का निर्देश दिया।
बीना विधायक निर्मला सप्रे के खिलाफ दल-बदल की याचिका लंबित है।
उमंग सिंघार ने इसे कांग्रेस और लोकतंत्र की जीत बताया।
वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक तन्खा ने याचिकाकर्ता की ओर से पैरवी की।
Supreme Court order on MLA Nirmala Sapre disqualification : मध्यप्रदेश के बीना से विधायक निर्मला सप्रे के कथित दल-बदल मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा आदेश दिया है। शीर्ष अदालत ने मध्यप्रदेश विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर को निर्मला सप्रे के खिलाफ लंबित अयोग्यता याचिका पर दो महीने के अंदर अंतिम फैसला करने को कहा है। यह याचिका नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने दायर की थी। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद कांग्रेस ने इसे अपनी बड़ी जीत बताया है।
बुधवार को सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत आने वाली दल-बदल से जुड़ी याचिकाओं का शीघ्र और समयबद्ध निराकरण होना चाहिए। अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि ऐसी याचिकाओं को लंबे समय तक लंबित नहीं रखा जा सकता। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट ने विधानसभा अध्यक्ष को दो महीने की समय-सीमा में फैसला लेने का निर्देश दिया।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने इसे लोकतंत्र और कांग्रेस की बड़ी जीत बताया। उनका कहना है कि दल-बदल से जुड़े मामलों में संवैधानिक व्यवस्था के अनुसार समय पर निर्णय होना चाहिए। कांग्रेस लंबे समय से निर्मला सप्रे की विधानसभा सदस्यता समाप्त करने की मांग कर रही है।
याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक तन्खा ने पैरवी की। उन्होंने मामले को संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत दल-बदल का स्पष्ट उदाहरण बताते हुए दलील दी कि निर्मला सप्रे ने कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीतने के बाद पार्टी छोड़कर भाजपा का साथ दिया और भाजपा के पक्ष में चुनाव प्रचार भी किया। इसके बावजूद विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष अयोग्यता याचिका पर अंतिम निर्णय नहीं हुआ।
निर्मला सप्रे ने 2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के टिकट पर सागर जिले की बीना सीट से जीत दर्ज की थी। मई 2024 में लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान वह मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मौजूदगी में भाजपा के मंच पर पहुंची थीं और भाजपा के समर्थन में सक्रिय दिखाई दी थीं। इसके बाद कांग्रेस ने उनके खिलाफ दल-बदल विरोधी कानून के तहत कार्रवाई की मांग की।
उमंग सिंघार ने विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष 30 जून 2024 को निर्मला सप्रे की सदस्यता समाप्त करने की याचिका दी थी। लंबे समय तक निर्णय नहीं होने पर उन्होंने हाईकोर्ट का रुख किया। जून 2026 में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी थी। हाईकोर्ट ने कहा था कि विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष कार्यवाही चल रही है और निर्मला सप्रे ने कांग्रेस छोड़ने या भाजपा में शामिल होने से इनकार किया है। इसके बाद सिंघार ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया।
इस पूरे मामले में निर्मला सप्रे का पक्ष भी महत्वपूर्ण है। वह पहले भी कह चुकी हैं कि उन्होंने न तो कांग्रेस से इस्तीफा दिया है और न ही औपचारिक रूप से भाजपा की सदस्यता ली है। वह खुद को कांग्रेस का सदस्य बताती रही हैं। ऐसे में अब सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद विधानसभा अध्यक्ष के फैसले पर सबकी नजर रहेगी।