Highlights:
बाग मुगलिया एक्सटेंशन में पहले से लगी लाइटों के बावजूद नई LED लाइटें लगाई जा रहीं।
स्थानीय रहवासियों ने सरकारी बजट के इस्तेमाल पर सवाल उठाए।
लाइटिंग प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत 2.5 करोड़ रुपये।
अंधेरे में डूबीं सड़कों को छोड़ने पर रहवासियों ने उठाए सवाल।
Bhopal PWD Street Light Project : राजधानी भोपाल में सरकारी विभागों के कामकाज का एक ऐसा लापरवाहीभरा मामला सामने आया है, जो सरकारी बजट के इस्तेमाल और विकास कार्यों की प्राथमिकताओं पर सवाल खड़े कर रहा है। बाग मुगलिया एक्सटेंशन कॉलोनी में PWD विभाग पहले से लगे बिजली के खंभों और उन पर मौजूद पर्याप्त लाइटों के बावजूद अतिरिक्त लाइटें लगा रहा है। कॉलोनी में कई खंभों पर नई लाइटें लगाई जा चुकी हैं, जबकि कई जगहों पर लगाने का काम जारी है।
हैरानी की बात यह है कि जिन स्थानों पर पहले से रोशनी की पर्याप्त व्यवस्था है, वहां दोबारा लाइटें लगाने पर स्थानीय रहवासियों ने सवाल उठाए हैं। लोगों का कहना है कि जब मौजूदा लाइटों से ही सड़कें रोशन हैं, तो फिर अतिरिक्त लाइटें लगाने के नाम पर सरकारी राशि क्यों खर्च की जा रही है?
मामला सिर्फ अतिरिक्त लाइटें लगाने तक सीमित नहीं है। भोपाल के कई ऐसे इलाके हैं, जहां शाम होते ही सड़कें और कॉलोनियां अंधेरे में डूब जाती हैं। लहारपुर से बरखेड़ा पठानी मार्ग पर करीब 22 साल से स्ट्रीट लाइट की समस्या बनी रहने की बात सामने आई है। वहीं प्रधानमंडपम से 11 मील मार्ग पर भी लंबे समय से रोशनी की व्यवस्था को लेकर सवाल उठते रहे हैं। इसके बावजूद बाग मुगलिया एक्सटेंशन में नई लाइटें लगाने का काम सवालों के घेरे में है।
इस पूरे मामले में एक और महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया है। उपलब्ध टेंडर रिकॉर्ड के अनुसार, बाग मुगलिया एक्सटेंशन कॉलोनी रोड पर बिजली की 33 KV और 11 KV लाइनों को शिफ्ट करने तथा LED स्ट्रीट लाइट लगाने का काम प्रस्तावित है। इस टेंडर की अनुमानित लागत करीब 2.5 करोड़ रुपये बताई गई है। टेंडर 24 अगस्त 2026 को अवॉर्ड होने का रिकॉर्ड भी उपलब्ध है। वहीं मीडिया रिपोर्ट्स में इस लाइटिंग प्रोजेक्ट पर करीब 3 करोड़ रुपये खर्च किए जाने की बात कही गई है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि विभाग जरूरत के हिसाब से काम करने के बजाय ऐसे स्थानों पर सरकारी बजट खर्च कर रहा है, जहां पहले से बिजली के खंभे और लाइटें मौजूद हैं। रहवासियों ने सवाल उठाया है कि अगर शहर के कई हिस्से अंधेरे में हैं, तो वहां लाइटें लगाने को प्राथमिकता क्यों नहीं दी जा रही? लोगों ने इस काम में संभावित अनियमितताओं और भ्रष्टाचार की आशंका भी जताई है।
भोपाल में स्ट्रीट लाइटों की बदहाली कोई नई समस्या नहीं है। अगस्त 2025 की एक रिपोर्ट में शहर की करीब 1300 स्ट्रीट लाइटें बंद होने और चार महीनों में 1301 शिकायतें दर्ज होने की बात सामने आई थी। वहीं अप्रैल 2024 की रिपोर्ट में भी शहर की कई कॉलोनियों और सड़कों पर अंधेरा रहने का मुद्दा उठाया गया था।
ऐसे में सवाल यह है कि जब राजधानी भोपाल में कई इलाके आज भी पर्याप्त रोशनी के इंतजार में हैं, तो बाग मुगलिया एक्सटेंशन में पहले से मौजूद लाइटों के साथ अतिरिक्त लाइटें लगाने की आखिर क्या जरूरत है? क्या विभाग ने इस काम से पहले जरूरत का सर्वे कराया था? क्या मौजूदा लाइटों और नए पोल लगाने की उपयोगिता का आकलन किया गया?
जहां पहले से स्ट्रीट लाइटें लगी हैं, वहां अतिरिक्त लाइटें लगाने की जरूरत किस सर्वे के आधार पर तय की गई?
बाग मुगलिया एक्सटेंशन में लाइटिंग प्रोजेक्ट की वास्तविक लागत कितनी है और ठेका किस कंपनी को दिया गया है?
क्या शहर के अंधेरे वाले इलाकों का सर्वे कराकर वहां लाइटें लगाने की योजना बनाई गई है?
एक ही स्थान पर दोहरी लाइटिंग से सरकारी बजट पर कितना अतिरिक्त बोझ पड़ेगा?
क्या विभाग इस पूरे प्रोजेक्ट का थर्ड पार्टी ऑडिट और गुणवत्ता परीक्षण कराने को तैयार है?
अब जरूरत है कि जिम्मेदार अधिकारी पूरे प्रोजेक्ट की जांच करें और स्पष्ट करें कि जनता के टैक्स का पैसा कहां और किस आधार पर खर्च किया जा रहा है।अब देखना होगा कि क्या PWD विभाग इस पूरे मामले में जवाबदेही तय करेगा या फिर सरकारी बजट के इस्तेमाल पर उठ रहे सवाल यूं ही बने रहेंगे?