Bhopal Gramin Dak Sevak Protest : राजधानी भोपाल में अपनी लंबित मांगों को लेकर ग्रामीण डाक सेवकों (GDS) ने पोस्ट ऑफिस कार्यालय के बाहर धरना-प्रदर्शन किया। प्रदेश के विभिन्न जिलों से पहुंचे कर्मचारियों ने केंद्र सरकार और डाक विभाग से अपनी मांगों पर जल्द निर्णय लेने की अपील की। प्रदर्शन के दौरान एक सेवानिवृत्त ग्रामीण डाक कर्मचारी की टिप्पणी चर्चा का विषय बन गई। उन्होंने अपनी पेंशन का जिक्र करते हुए कहा, "काश मैं लाड़ली बहना होता, तो सरकार मेरा भी ध्यान रखती।"
इंदौर से आए सेवानिवृत्त ग्रामीण डाक कर्मचारी ने बताया कि पूरी जिंदगी ग्रामीण क्षेत्रों में सेवा देने के बाद उन्हें महज 246 रुपये प्रतिमाह पेंशन मिल रही है। उन्होंने कहा, "अगर मैं लाड़ली बहना योजना का लाभार्थी होता तो हर महीने 1500 से 3000 रुपये तक की सहायता मिलती, लेकिन वर्षों की सरकारी सेवा के बाद भी सम्मानजनक पेंशन नहीं मिल रही है।" उनके इस बयान ने प्रदर्शन में मौजूद कर्मचारियों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया।
धरना प्रदर्शन के दौरान अखिल भारतीय ग्रामीण डाक सेवक संघ ने केंद्रीय संचार मंत्री एवं पूर्वोत्तर विकास मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के नाम ज्ञापन सौंपकर हस्तक्षेप की मांग की। संघ का कहना है कि देशभर में 2.6 लाख से अधिक ग्रामीण डाक सेवक डाक वितरण, बैंकिंग, बीमा और विभिन्न सरकारी योजनाओं की सेवाएं गांव-गांव तक पहुंचा रहे हैं, लेकिन उन्हें अब तक नियमित केंद्रीय कर्मचारियों जैसी सुविधाएं और अधिकार नहीं मिले हैं।
संघ के परिमंडल सचिव राम सिंह धाकड़ (नेगमा) ने कहा कि सरकार ने 8वें केंद्रीय वेतन आयोग के गठन की घोषणा कर दी है, लेकिन ग्रामीण डाक सेवकों को उसके दायरे से बाहर रखा गया है। उन्होंने मांग की कि जीडीएस कर्मचारियों को भी 8वें वेतन आयोग में शामिल किया जाए या उनके लिए अलग वेतन आयोग का गठन किया जाए।
ज्ञापन में नियमित कर्मचारियों के समान पेंशन, व्यापक सामाजिक सुरक्षा, सीजीएचएस/ईएसआई जैसी स्वास्थ्य सुविधाएं, ग्रेच्युटी, सेवा का नियमितीकरण, वास्तविक कार्यभार के अनुरूप वेतन, एमएसीपी का लाभ, समूह बीमा कवरेज बढ़ाने, मकान किराया भत्ता और कार्यालय रखरखाव भत्ता सहित 15 प्रमुख मांगें उठाई गई हैं।
ये भी पढ़ें : दतिया उपचुनाव: क्यों कटा टिकट, क्या नरोत्तम मिश्रा का होगा पॉलिटिकल कमबैक? ज्योतिषीय विश्लेषण में बड़ा दावा
संघ ने आरोप लगाया कि ग्रामीण डाक सेवकों पर लगातार अतिरिक्त कार्यभार और लक्ष्य का दबाव बढ़ाया जा रहा है, जबकि उन्हें उसके अनुरूप वेतन और सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो उग्र आंदोलन किया जाएगा।