600 Crore Treasury Scam Protest Bhopal: मध्य प्रदेश के सरकारी खजाने में सामने आई करीब 600 करोड़ रुपए की कथित वित्तीय गड़बड़ी को लेकर कांग्रेस ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। बुधवार को मध्य प्रदेश युवा कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने उपमुख्यमंत्री और वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा के भोपाल स्थित आवास के बाहर विरोध प्रदर्शन किया।
प्रदर्शन के दौरान युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने प्रतीकात्मक रूप से नकली नोट उड़ाकर सरकार के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराया। कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि सरकारी भुगतान प्रणाली में इतनी बड़ी राशि की गड़बड़ी होना गंभीर वित्तीय और प्रशासनिक लापरवाही का मामला है।
युवा कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष अभिषेक परमार ने सरकार पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि करीब 600 करोड़ रुपए की इतनी बड़ी राशि की गड़बड़ी के मामले में केवल निचले स्तर के अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्रवाई करना पर्याप्त नहीं है। परमार का आरोप है कि इतनी बड़ी रकम का गबन बिना उच्च स्तर के संरक्षण के संभव नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए और जिम्मेदारी तय होने पर बड़े अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि वित्त विभाग की जिम्मेदारी संभाल रहे उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा को इस मामले की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देना चाहिए।
हालिया मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मध्य प्रदेश के ट्रेजरी सिस्टम में करीब 600 करोड़ रुपए की वित्तीय अनियमितताओं का मामला सामने आया है। जांच में सरकारी भुगतान प्रणाली आईएफएमआईएस के जरिए फर्जी या अनधिकृत भुगतान किए जाने की बात सामने आई है। कुछ मामलों में सरकारी राशि कर्मचारियों, उनके परिजनों और परिचितों के खातों में पहुंचने की रिपोर्ट है। मामले में करीब 400 अधिकारियों-कर्मचारियों के खिलाफ FIR की जानकारी भी सामने आई है।
उपमुख्यमंत्री के आवास के बाहर प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया। कार्यकर्ताओं ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए मामले में उच्च स्तर पर जवाबदेही तय करने की मांग की। विपक्ष लगातार इस वित्तीय गड़बड़ी को लेकर सरकार पर सवाल उठा रहा है। कांग्रेस की ओर से वित्त मंत्री के इस्तीफे और पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग भी उठाई गई है। अब देखना होगा कि सरकार इस मामले में विपक्ष के आरोपों पर क्या जवाब देती है और जांच में 600 करोड़ रुपए की कथित वित्तीय गड़बड़ी के लिए आखिर किस स्तर तक जिम्मेदारी तय होती है।